आशाएं जोगिन हुईं,चाहें चढी सलीब
सपने यायावर हुए,अपना यही नसीब
तन-मन-चिंतन,बुद्धि-बल,घर-आँगन-परिवार
महा नगर में हो गए सबके लघु आकार
आल्हा,ढोला,लोरकी,फगुआ,गीत,मल्हार
कौन सुने?गायें कहाँ?उलझन लगी हजार
मुल्ला-पंडित,पादरी,पीर,सयाने लोग
ये कैसे बांटें दवा,बाँट रहे जो रोग
मिली जिंदगी के लिए,इतनी-सी सौगात
वित्ता भर की चाँदनी,कोसों लम्बी रात
प्रेम,त्याग,बंधुत्व,प्रण,गए मधुरता भूल
फटी जेब थी खो गए,अपने सभी उसूल
तन हो चंदन-पाँखुरी,मन फूलों का सार
कैसे कहें की प्रीति है,कठिन खडग की धार
राम,कृष्ण,ईसा,रिषभ,बुद्ध और महावीर
बेटी तेरे ही ऋणी, संत, महंत, फ़कीर
जाने कब,किस मोड़ पर,तुमसे भेंटें प्राण
भूल गए उस रोज से,हम अपनी पहचान
फागुन पर चंद दोहे:
ज्ञान,ध्यान,संयम भला,कैसे रहे स्वतंत्र
जब फागुन पढने लगा,सम्मोहन के मंत्र
फागुन लेकर आ गया,है छैनी का साज
उर-पाषणों में जगी,एक अजंता आज
खोली मन की डायरी,सुधियाँ जगीं अनाम
पृष्ठ पृष्ठ पर लिख गया,फागुन तेरा नाम
चाह राधिका सी सजी,रूप हुआ घनश्याम
फागुन में होने लगा,मन वृन्दावन धाम
तुम साँसों में बस गयीं,बन बंसी अभिराम
तन वृन्दावन हो गया,पागल मन घनश्याम
ज्ञानी,ध्यानी,संयमी,जोगी,जती,प्रवीण
फागुन के दरबार में,सब कौडी के तीन
(विलक्षण प्रतिभा के धनि, डा.राम स्नेही लाल शर्मा "यायावर" एम. ए.,पी.एच.डी.,डी.लिट. फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वहीँ के एस.आर.के. स्नातकोत्तर कालेज के हिन्दी विभाग में रीडर हैं. आप की कई पुस्तकें प्रणय गीत, मुक्तक, और ग़ज़ल जैसे विषयों पर प्रकाशित हो चुकी हैं. इसके अलावा देश की लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं जो बहुत सराही गयी हैं.
माँ सरस्वती के इस लाडले पुत्र की पुस्तक "आंसू का अनुवाद" के विभिन्न विषयों पर लिखे 720 दोहों में से चुने गए कुछ दोहे अपने ब्लॉग पर पोस्ट कर मैं अति प्रसन्न हूँ. )
{ पुस्तक "अनुसंधान" न्यू माडल कोलोनी, बरेली-243122 मोबाईल: 09410219930 से संपर्क कर के प्राप्त की जा सकती है. मूल्य:80 रु.मात्र }
{ आप लेखक से सीधे 09219412159, 09412316779 पर भी बात कर उन्हें बधाई दे सकते हैं अथवा dr_yayawar@yahoo.com पर लिख सकते हैं. }
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