नीरज
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Thursday, July 10, 2008

दोहे

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(डा.राम स्नेही लाल शर्मा "यायावर") आशाएं जोगिन हुईं,चाहें चढी सलीब सपने यायावर हुए,अपना यही नसीब तन-मन-चिंतन,बुद्धि-बल,घर-आँगन-परि...
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ये हूँ मैं

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नीरज गोस्वामी
जयपुर, राजस्थान, India
अपनी जिन्दगी से संतुष्ट,संवेदनशील किंतु हर स्थिति में हास्य देखने की प्रवृत्ति. इंजीनियरिंग करने के बाद ,जीवन के 44 साल स्टील कंपनियों में मौज मस्ती के साथ सफलता पूर्वक, गुज़ारने के बाद अब जयपुर अपने घर पूर्ण विश्राम की अवस्था को प्राप्त। कल का पता नहीं।लेखन, अपने को लेखक होने का भ्र्म पाले रखने के लिए।
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