Sunday, September 30, 2007

आंखे खोल के देखो







जान उन बातों का मतलब

जो होती हैं सी कर लब


सब जब कहते एक ही है

क्यों हिस्सों में बांटों रब


शाम हुई दिल बैठ रहा है

अभी बितानी सारी शब


रोना हँसना घुटना मरना

इस जीवन में मिलता सब


जलती जाती देह की बाती

बुझ जायेगी जाने कब


तुमको कल का बड़ा भरोसा

पर होता जो करलो अब


जाम उठाके पियो आज तो
कल जो होगा देखेंगे तब


"नीरज" आंखे खोल के देखो

हर सू उसके ही करतब