जो होती हैं सी कर लब
सब जब कहते एक ही है
क्यों हिस्सों में बांटों रब
शाम हुई दिल बैठ रहा है
अभी बितानी सारी शब
रोना हँसना घुटना मरना
इस जीवन में मिलता सब
जलती जाती देह की बाती
बुझ जायेगी जाने कब
तुमको कल का बड़ा भरोसा
पर होता जो करलो अब
जाम उठाके पियो आज तो
कल जो होगा देखेंगे तब
"नीरज" आंखे खोल के देखो
हर सू उसके ही करतब

