Friday, September 5, 2008

नमन, नमस्ते, नमस्कार




लीजिये मेरे ब्लॉग को प्रकाश में आए आज एक साल हो गया...पीछे मुड कर देखता हूँ तो हैरत होती है की कैसे पलक झपकते ही एक साल बीत गया. अभी कल सी बात लगती है जब शिव ने कहा था भईया आप का एक ब्लॉग बना रहा हूँ, आप इसमें पोस्ट किया कीजिये. ब्लॉग बन गया एक ग़ज़ल पोस्ट की इंतज़ार किया की देखें कौन पढता है...किसी ने नहीं पढ़ी. चिंतित हो कर ज्ञान भैय्या से गुहार लगाई और उन्होंने अपने ब्लॉग पर मेरे ब्लॉग तक पहुँचने का लिंक दिया ये कहते हुए की भाई एक शायर पैदा हुआ है ब्लॉग जगत में उसकी हौसला अफजाही करो. शिव ने इस बीच एक पोस्ट ही हमारे नाम पर ठेल दी, जिसमें उन्होंने हमारी बिना बात ही खूब तारीफ कर दी.
उस पोस्ट को पढ़ कर या पता नहीं हमारी अंतरात्मा की आवाज को सुन कर कुछ ब्लोगर भाई बहिन आए और साथ ही लाये कॉमेंट्स की सौगात. ब्लॉग ने मुझ साधारण से इंसान का परिचय बहुत से असाधारण लोगों से करवाया. कुछ से परिचय इतना बढ़ा, की लगा ही नहीं ये कभी अजनबी, अपरिचित थे.

आज की पोस्ट में मैं उन सब को याद करते हुए नमन, नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम,सत श्री अकाल, सलाम और हाय करता हूँ.

१ ब्लोगर जिनसे मैं मिला.
इसे मेरा दुर्भाग्य कहिये की लाख कोशिशों और निमंत्रण देने के बावजूद मुझे अधिक ब्लोगर्स से मिलने का सौभाग्य प्राप्त अभी तक नहीं हुआ. जिन चंद ब्लोगर्स को मिल पाया हूँ वो हैं उड़न तश्तरी में विचरण करने वाले समीर भाई, अपनी कॉफी से रिझाने वाले कुशजी, अपनी पाक कला और कलम का लोहा मनवाने वाली अनीता जी, हिन्दी की गरिमा बढ़ाने वाले कवि कुलवंत जी और अपनी कहानियो से मायावी संसार रचने वाले भाई सूरज प्रकाश जी.

२. ब्लोगर जिनसे नहीं मिला लेकिन लगता है कि मिला हूँ
ऐसे परम प्रिय मित्रों की सूची लम्बी है जिनसे बिना मिले हरदम मिले जैसा अनुभव होता है. ये दिल के इतने करीब हैं की लगता ही नहीं अपरिचित हैं. इन लोगों से परिचय जीवन की एक उपलब्धि है. इन मित्रों को मैं दो श्रेणियों में रखता हूँ एक तो वो जिनकी आवाज सुनता रहता हूँ और दूसरे वो जिनका पत्र मिलता रहता है.

2a: आवाज के मित्र
छोटे भाई शिव कुमार मिश्रा और ज्ञान भईया के अलावा जिनकी आवाज ने मुझे संबल दिया है उनमें भाई पंकज सुबीर जी और द्विज जी का नाम आता है. उस वक्त जब ग़ज़ल के अथाह सागर में हाथ पाँव मारते हुए मैं तैरने की कोशिश कर रहा था तब इन्ही दो महानुभावों ने मुझे सिखाया की कैसे तैरा जाता है...हाथ पाँव मारने और तैरने में जो अन्तर है वो इन्होने समझाया और बड़े प्रेम से समझाया. आज भी जब कभी लेखन में मुझे दुविधा होती है ये मेरा मार्ग दर्शन करते हैं. कवि श्रेष्ट भाई राकेश खंडेलवाल जी ने समय समय पर मेरा उत्साह बढाया है, पंकज औधिया जी ने कई बार ये कह कर की मैं आप से मिलने आरहा हूँ अपना वादा तोडा है , इसके अलावा कलकत्ता के मीत साहेब से एक आध बार और बाल किशन महाराज से कई बार बात हुई है और आनंदित हुआ हूँ.

2b: पत्र के मित्र
अपने पत्रों से प्रेम प्रर्दशित करने वालों में अति संवेदन शील डाक्टर अनुराग, स्वर कोकिला पारुल जी, शब्दों के जादूगर भाई मनीष (जोशिम), ग़ज़ल सम्राट भाई मुदगिल जी, परम आदरणीय महावीर जी,दूर देश बैठीं बहिन मिनाक्षी जी, शब्दों का जादू बिखेरती छोटी बहिन स्वाति,अमृता प्रीतम की दीवानी रंजना जी, छोटी छोटी रचनाओं के माध्यम से जिंदगी सिखाने वाले भाई चंद्र कुमार जैन जी, रेडियो से सुर सरिता बहाने वाले युनुस भाई जी और सबसे पंगा लेने में उस्ताद अरुण जी सर्वोपरि हैं.

३. मेरे सहारे
ये वो लोग हैं जिनके होने से ही मैं हूँ. ये लोग मेरी ऊर्जा हैं, मुझे जिस स्थान पर मैं आज हूँ, वहां खड़े किए हुए हैं.मेरे अच्छे बुरे को इन्होने अपनाया है और अपने शब्दों से मुझे सहारा दिया है. ये वो लोग हैं जिनसे मिले उत्साह जनक शब्दों बिना शायद मैं आज ये पोस्ट ना लिख रहा होता. इन सब का नाम लेना बहुत मुश्किल का काम है क्यूँ की मैं नहीं चाहता इनमें से किसी भी एक का नाम छूट जाए, फ़िर भी डरते डरते कोशिश करता हूँ अगर कहीं भूल चूक हो जाए तो क्षमा कीजियेगा और इस भूल के लिए डांट भी लगाईयेगा.

चलिए शुरुआत करते हैं हास्यावतार आलोक पुराणिक जी से, और फ़िर लेते हैं अनूप शुक्ला जी, अनुनाद सिंहं जी, अखिलेश सोनी जी, बोधिसत्व जी ,अल्पना वर्मा जी, बसंत आर्य जी, अनिल रघुवंशी जी,अनिल चढ्ढा जी, अनूप भार्गव जी,बेजी जी, अनुराधा श्रीवास्तव जी, अनिल रघुराज जी,अजय कनोडिया जी,अजित जी,आशीष जी, अमिताभ फौजदार जी,अनुराग अन्वेषी जी,अनुराग आर्य जी,अतुल जी,अभिषेक ओझा जी, आशीष अंशु जी, बवाल जी,दीपांशु गोयल जी, अशोक पाण्डेय जी, इष्ट देव जी, जगत चंद्र जी, काकेश जी,क्रिशन लाल किशन जी,हर्षवर्धन जी,हेमज्योत्सना जी, कंचन सिंहं चौहान जी, जे.पी.नारायण जी, जीतेन्द्र भगत जी, इला जी, हर्ष जी,हरिमोहन जी,कुमुस्कन जी,घोस्ट बस्तर जी,हर्षद जंगला जी,खरी खरी जी,हनी हनी सब कुछ जी, नीलम जी, मोहिंदर जी,मनीष जी, प्रियंकर जी, घुघूती बासूती जी,परमजीत बाली जी, नीरज रोहिल्ला जी, प्रभाकर जी, महाशक्ति जी,महेंद्र मिश्रा जी, ममता जी, प्रवीण चौपडा जी,लवली कुमारी जी,मथुरा कोलोनी जी, प्रभाकर पाण्डेय जी,महामंत्री तस्लीम जी, पल्लवी त्रिवेदी जी, लावण्या जी, ललित मोहन जी, संजीत त्रिपाठी जी, शिरीष जी, सतेन्द्र श्रीवास्तव जी, रवि रतलामी जी, सुनीता(शानू) जी, सुभाष भौदौरिया जी, शोभा जी, राजीव जैन जी, सागर नाहर जी,रजनी भार्गव जी,विनोद कुमार जी, रीतेश जी, सृजन शिल्पी जी,विनय ओझा जी,राज यादव जी, तरुण जी, राज भाटिया जी, रोहित जी, रविन्द्र प्रभात जी, राजीव रंजन जी, राकेश रोशन जी, रक्षंदा जी, विजय चतुर्वेदी जी, रमेश पटेल जी,सीमा गुप्ता जी, विजय गौड़ जी, सुशील कुमार जी, श्रध्दा जैन जी, रंजन गोरखपुरी जी, जाकिर अली जी, शायद जी, ताऊ रामपुरिया जी, पूजा जी, नीतिश राज जी, स्मार्ट इंडियन जी,प्रीति बर्थवाल जी, रामपुरिया जी, अमर जी, राधिका जी,अमर ज्योति जी, चन्द्र मोहन गुप्ता जी ,चिराग जैन जी, विपिन ज़िन्दगी जी, अहमद अली बर्की जी. सुमित सिंह जी ,रश्मि प्रभा जी,शैली खत्री जी........और और और...बहुत से चाहने वालों का नाम.
इनके अलावा मेरे मित्र श्री चाँद हदियाबादी और गुरु प्राण शर्मा जी का जिक्र भी करना चाहूँगा, जिनका ब्लॉग नहीं है लेकिन बहुत बड़ा सहारा है.

अंत में आप सब से अनुरोध है की जो प्यार और आशीर्वाद आप सब ने मेरी रचनाओं और उससे भी अधिक इश्वर की रचना " मिष्टी " को दिया है उसे भविष्य में भी देते रहें ताकि ये सफर यूँ ही चलता रहे.......