Thursday, March 12, 2009

मुझे ससुराल वाले याद आते हैं

ब्लॉग जगत के अब तक के आयोजित श्रेष्ठ मुशायरों में से एक मुशायरा होली के अवसर पर पंकज सुबीर जी ने अपने ब्लॉग पर आयोजित किया, जिसमें देश विदेश के कई नए पुराने शायरों ने शिरकत की और समां बांध दिया. उस मुशायरे की रूप रेखा और संयोजन पंकज जी ने इतनी मेहनत और खूबसूरती से किया की पाठक तालियाँ बजाते बजाते वाह वाह कर उठे. उसी मुशायरे में इस खाकसार को भी अपनी ग़ज़ल पेश का न्योता मिला था.

खालिस होलियाना मूड में लिखी उसी ग़ज़ल को जिसे आप शायद पंकज जी के ब्लॉग पर पढ़ आये होंगे, आज मैं आप की प्रतिक्रिया जानने के लिए अपने ब्लॉग पर प्रस्तुत कर रहा हूँ.



पंकज सुबीर जी की नज़र में -" मैं "



पिलायी भाँग होली में,वो प्याले याद आते हैं
गटर, पी कर गिरे जिनमें, निराले याद आते हैं

दुलत्ती मारते देखूं, गधों को जब ख़ुशी से मैं
निकम्मे सब मेरे कमबख्त, साले याद आते हैं

गले लगती हो जब खाकर, कभी आचार लहसुन का
तुम्हारे शहर के गंदे, वो नाले याद आते हैं

भगा लाया तिरे घर से, बनाने को तुझे बीवी
पढ़े थे अक्ल पर मेरी, वो ताले याद आते हैं

नमूने देखता हूँ जब अजायब घर में तो यारों
न जाने क्यूँ मुझे ससुराल वाले याद आते हैं

कभी तो पैंट फाड़ी और कभी सड़कों पे दौड़ाया
तिरी अम्‍मी ने जो कुत्‍ते, थे पाले याद आते हैं

सफेदी देख जब गोरी कहे अंकल मुझे 'नीरज'
जवानी के दिनों के बाल काले याद आते हैं


54 comments:

"अर्श" said...

us tarahi mushaayare ke kya kahane.. hasi se lot pot hote nahi thakte.. wakai guru ji ne bahot mehnat kari hogi sabhi ko choli aur ghaghara pahanaane me ... aap bhi khub bhaa rahe ho is poshaak me ... ufffff...kya haun... abhaar aapka aur aapko badhaee..


arsh...

Mumukshh Ki Rachanain said...

अब बार-बार क्या लिखूं?????????????????
सुबीर जी के ही ब्लॉग पर टिप्पणी पढ़ लें.

होली की हार्दिक बधाई.
पर क्या करुँ, होली के रंग ने किया विवश सो कह रहा हूँ...................

होली पर २-२ पोस्ट मैंने पेशियाई
एक पर भी टिप्पणी न आयी.
व्यस्त, अतिव्यस्त या और कुछ
नशे में याददास्त भी चरमराई.

कुछ ने कहे सुन्दर लगी हो
ड्रेस कहाँ से सिलवाई है
गधा भी ठिठका, पीछे क्यूं लगी
दुलत्ती इसे से है लगाई .

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

भई वाह्! नीरज जी, क्या खूब लिखा है.....पूरी तरह से होलीमय.........

शोभित जैन said...

बड़ी ही खतरनाक पोस्ट है नीरज जी... बीबी, सास , ससुर, ससुराल, साले किसी को भी नहीं छोडा.. खतरनाक इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि अगर श्रीमती नीरज जी ने पढ़ लिया तो मुझे लगता है की अगली होली पर ये लाइन भी प्रकाशित करना पड़ेगा...

सोफे की कमर तोड़ रहा हूँ साल भर से मैं..
क्यूँ लिखा ससुराल पर, पीठ के छाले याद आते हैं....

आपको एवं समस्त परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें

कुश said...

ये भी होली मनाने का एक अंदाज़ है.. मज्ज़ेदार

mehek said...

:);).mann lotpot hua jaa raha ,shabdaar:):)

ताऊ रामपुरिया said...

गजब..गजब..गजब नीरज जी.

होली की घणी रामराम.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

खूब रँगे आप होली के रंग में ..बहुत बढ़िया

Science Bloggers Association said...

होली में ससुराल तो सभी को अच्‍छी लगती है।

neeshoo said...

नीरज जी हमने देखा था । वैसे होली के रंग आप लोगों पर ही ज्यादा चढ़े । पंकज जी ने समा बांध दिया था ।

रंजन said...

फिट है, हिट है...

Vijay Kumar Sappatti said...

neeraj ji , holi to bus yahin par man rahi hai , subeer ji ne jo sama baandha tha , usi ko jordaar extension ye post hai

jai ho [ li ]

poemsnpuja said...

शानदार...गजब लिखा है...मस्त...बड़ा मज़ा आया पढ़ कर, हम तो हंसते हंसते लोटपोट हो गए. कमाल का लिखा है, दिल कर रहा है तारीफ़ कोई दो चार पन्नो की कर दूं :)

Udan Tashtari said...

ओए होए-नीरजा जी तो छा गई!!!!


बहुत बेहतरीन!!! वहाँ भी सुने थे न महफिले मुशायरा में!!

नजर उतरवा लेना छन्नो से!!

डा. उदय ’ मणि ’ said...

भई वाह आन्म्द आ गया नीरज जी

आपकी रचना के लिये बधाई
और फ़िर असीम शुभकामनाओ सहित


तीन मुक्तक होली पर

लगें छलकने इतनी खुशियां , बरसें सबकी झोली मे
बीते वक्त सभी का जमकर , हंसने और ठिठोली मे
लगा रहे जो इस होली से , आने वाली होली तक
ऐसा कोई रंग लगाया , जाये अबके होली मे



नजरें उठाओ अपनी सब आस पास यारों
इस बार रह न जाये कोई उदास यारों
सच मायने मे होली ,तब जा के हो सकेगी
जब एक सा दिखेगा , हर आम-खास यारों

और

मौज मस्ती , ढेर सा हुडदंग होना चाहिये
नाच गाना , ढोल ताशे , चंग होन चाहिये
कोई ऊंचा ,कोई नीचा , और छोटा कुछ नही
हर किसी का एक जैसा रंग होना चाहिये




शुभकामनाओ सहित
डा. उदय मणि
http://mainsamayhun.blogspot.com

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

यह छवि देख मन कहता - आ जा!
ओ नीरजा!!!

अल्पना वर्मा said...

aap ka ruup rang badala badlaa dekha tha subeer ji ke blog par kal..

aap ne yahan bhi utaar diya nirajaa ko!hee hee hee! bahut khuub!
aur yah gazal bhi apne aap mein ek namoona hai!
holiyayee rachnaon ka nayab sample!
:D

vandana said...

waah waah niraj ji
aaj to bahut purani yaadein taaza kar din.kabhi mushayre suna karte the tab holi ke aise chand sunne ko milte the.

Mired Mirage said...

पढ़ते हैं जो यह कविता तो
वाह वाह शब्द याद आते हैं!
घुघूती बासूती

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह जी भाई जी
होलियाना ड्रैस खूब जंची
मजा आ गया

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह मजा आ गया। फोटो में तो गजब के लग रहे है आप :-)
सच पंकज जी की लेखनी का जवाब नही।

anitakumar said...

हा हा हा……नीरजा जी से मिल कर बहुत खुशी हुई।
सुबीर जी के ब्लोग पर भी मिले थे इनसे, इन्हें देख होली के गुजरे जमाने याद आते हैं

अनूप शुक्ल said...

शानदार! अब बचिये कहीं ससुराल वाले प्रेम प्रदर्शन के लिये आते न हों!

the pink orchid said...

waah waah,, :)

Dr. Chandra Kumar Jain said...

एकदम सफ़ेद जवानी की
रंगीन-सी ग़ज़ल है भाई,
बुरा न मानें..ये है हमारी
होली की बधाई ===========

डॉ.चन्द्रकुमार जैन

dwij said...

भाई जान
यहाँ तो आपने पाठकों को होली और हास्य के महाकुण्ड मे गोते लगवाने का महाप्रबन्ध
कर रखा है.

विलम्ब से यहाँ आने के लिए मुआफी दें.


अगले वर्ष की होली तक हँसाने के इस इंतज़ाम के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई.

आज तो हँसते-हँसते पेट में बल पड़ गये
.
आपको भाई सुबीर जी ने पोशाक भी सुन्दर पहनाई है और आप बहुत खूब भी लग रहे हैं.

बधाई.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आपको सपरिवार होली की मँगल कामनाएँ
नीरज जी ..
गीत तो वाकई,
बहुत ज़ोरदार लिखा है आपने !:)
- लावण्या

रश्मि प्रभा said...

holi ke rang,bhaang ke sang....aur ye nazm........maza aa gaya

cmpershad said...

बढिया और बेबाक लेकिन थोडी सावधानी बरतनी चाहिए - भई घर में बवाल न हो जाय, यह सवाल न हो जाय कि म्रेरे भाई ने आप का क्या बिगाडा? है कि नै:)

राज भाटिय़ा said...

नीरज जी आप की जुलफ़े बडी प्यारी लगी. बिलकुल आप की कविता की तरह से , बहुत ही सुंदर.
धन्यवाद

मुंहफट said...

जवानी के दिनों के बाल काले याद आते हैं.
वैसे नीरज भाई आप इतने उम्रदराज भी तो नहीं लगते. मैं प्रायः आपकी रचनाएं आपके चित्र की प्रिय-सहज मुखमुद्रा से जोड़कर पढ़ा करता हूं. और मन ही मन मान लेता हूं कि ऐसे लोग निजी जीवन में भी जरूर उतने ही अच्छे और सहज होते हैं. पंक्तियां जोरदार हैं. आपको पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. रचना पर बधाई.

Pratik Maheshwari said...

वाह फोड़ा सर आपने तो..
माफ़ करियेगा ये बिट्सियन भाषा में कुछ ऐसे ही कहते हैं..
मज़ा आ गया..
होली की बहुत बहुत बधाईयाँ...

Nitish Raj said...

hit, superhit, bumperhit,
बहुत खूब, ये मैं अपने ऑफिस में सब को पढ़ाऊंगा। बहुत ही उम्दा।

Dr. Amar Jyoti said...

बहुत ख़ूब!:)

पंकज सुबीर said...

वैधानिक चेतावनी : इस प्रकार की गजल लिखना और प्रकाशित करना गृहस्‍थ जीवन के लिये हानिकारक हो सकता है । ये ग़ज़ल जिन मुख्‍य बीमारियों को जन्‍म दे सकती है वे निम्‍न हैं ।
1 : माथे का गूमड़ : ये एक आम बीमारी है जो भारतीय पतियों में पाई जाती है । ऐसा माना जाता है कि ये रोटी बनाने के एक मुख्‍य यंत्र की चोट से उत्‍पन्‍न होती है । ये यंत्र माथे पर कैसे लगता है ये रहस्‍य है ।
2: पेट दर्द : ये बीमारी भी भारतीय पतियों में पाई जाती है । डाक्‍टरों क अनुसार ये बीमारी जली रोटियों को खाने से होती है । किन्‍तु ये ज्ञात नहीं हो पाया है कि भारतीय पति किन परिस्थितियों में जली रोटियां खाते हैं ।
ये कुछ बीमारियां हैं जो कि भारतीय पतियों को अक्‍सर तब होती हैं जब वे अपनी सुसुराल के बारे में कोई असंवैधानिक टिप्‍पणी को सार्वजनिक स्‍थल पर मौखिक या प्रकाशित रूप से उजागर कर देते हैं । भारतीय पतियों के मामले में चूंकि कोई भी प्रताड़ना से बचाने का कानून नहीं है इसलिये उनको सार्वजनिक रूप से ये ही कहना होता है कि कल बाथरूम में फिसल जाने से माथे पर गूमड़ हो गया है ।
आपका एक शुभचिंतक

Abhishek said...

होलीमय ग़ज़ल. शुभकामनायें.

Harkirat Haqeer said...

Ab kya kahun Niraj ji...holi par mai itani acchi gazal ka aanand n le payi.... aa ha ha ... gazal ki to dur yahan tippaniyan holi ke rang se lathpath hain...aur ye Subir ji ne acchi chetavani de rakhi hai...dhyan rakhiyega....!!

Aapki gazal padhkar to holi n khel pane ka mlal bhi n rha...!!

Puneet said...

कमाल कर दिया आप ने नीरज जी बहुत ही उम्दा, हंसते हंसते पेट में दर्द हो गया !
होली की बहुत बहुत बधाईयाँ आप को.

bhootnath( भूतनाथ) said...

बहुत दिनों तक अपन नेट पर नहीं आये...नीरज जी के रिसाले याद आते रहे.....पता चला कि नीरज जी हमारे ब्लॉग को आबाद करने आते रहे...सालियाँ तो जा बैठी अपने-अपने ससुराल में....और हमें साले याद आते रहे...!!.....घरवालों ने निकालकर कब्र में फेंका था हमें.....जिन्दगी के बाद भी वो घरवाले याद आते रहे....नीरज जी अच्छी रोमांचक कविता के लिए बधाई....क्या कहा...ग़ज़ल थी भाई.....!!अरे हमपर से उतरी नहीं है भांग की नशायी....!!

bhootnath( भूतनाथ) said...

हमें आपने कुत्ता कहा...ये ठीक नहीं किया नीरज जी....हम तो उसके सगे भाई थे ....जिसे आप उस नुक्कड़ वाली दूकान के बाजू में छेडा करते थे........!!

Harshad Jangla said...

ग़ज़ल तो भाई हमने पूरी पढ़ लि है लेकिन
"नीरज" के वो रंगीन और करतूत काले याद आते हैं |

बहुत खूब नीरजभाई |

-हर्षद जांगला
एटलांटा, युएसए

डॉ .अनुराग said...

देर से आने के लिए मुआफी नीरज जी.....होलियाने बनारस गया था ....पर यहाँ लगता है आपने भी खूब मस्त रंग घोले है ..वाकई...आप ऐसे है ????नहीं हजूर इससे कही ज्यादा बिगडे हुए ....

NirjharNeer said...

wowwwwwwwwwwwwwwwwwwww

maza aa gaya neeraj jii
holi ka khoob rang chadha hai

समीर सृज़न said...

"भगा लाया तेरे घर से बनाने को तुझे बीवी,
पड़े थे अक्ल पे मेरी,वो ताले याद आते है..
नमूने देखता हूँ जब अजायबघर में तो यारों,
ना जाने क्यूँ ससुराल वाले मुझे याद आते हैं..."

वाह नीरज जी होली के बहाने कविता और गज़लों द्वारा अपने ससुराल पक्ष को लतारने का आपका अंदाज़ वाकई निराला है...और हां आज ये बात भी साबित हो गयी की हम सभी को जवानी की याद हमेशा आती है..
बधाई..

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

kya baat hae .mushayra to hmne live dekha .

shyam kori 'uday' said...

गजल में रंग, गुलाल, भाँग, पान, इश्क-मोहव्वत, मौज-मस्ती सभी का सतरंगी मजा है, शुभकामनाएँ !!!!!

अंकित "सफ़र" said...

नमस्कार नीरज जी,

ghazal तो अपने आप में bejod है.......
सुबीर जी ने सब को सजाने में बहुत मेहनत की. और उसपे इतनी jabardast टिप्पणी एक शुभचिंतक के रूप में.

दिगम्बर नासवा said...

maafi नीरज जी देर से आने की .......
लगता है rango की bahaar ने आप पर खूब asar dikhaaya है bahoot उम्दा, हंसते हंसते पेट में दर्द हो गया
लिखने को शब्द chode hain is baar,
kyaa baat hai sarkaar.....aapke haasy par vaari vaari

BrijmohanShrivastava said...

पंकज जी ने आपको सही पहिचाना

संदीप शर्मा Sandeep sharma said...

आपको भी होली की शुभकामनायें....

Dr. Amar Jyoti said...

भई वाह! अद्भुत!
और क्या कहें?

मा पलायनम ! said...

देर के लिए माफी , इस रचना के लिये बधाई .

Mrs. Asha Joglekar said...

गोरी तेरा लहंगा बडा प्यारा
होली का त्यौहारा
जाती कहाँ रे ।

Priya Ranjan said...

Ati ati ati uttam. Bahut badia.