Monday, June 1, 2015

छुपाये हुए हैं वही लोग खंज़र

बहुत अरसे बाद एक साधारण सी ग़ज़ल हुई है



नहीं है अरे ये बग़ावत नहीं है 
 हमें सर झुकाने की आदत नहीं है 

 छुपाये हुए हैं वही लोग खंज़र
 जो कहते किसी से अदावत नहीं है 

 करूँ क्या परों का अगर इनसे मुझको 
 फ़लक़ नापने की इज़ाज़त नहीं है 

 उठा कर गिराना गिरा कर मिटाना 
 हमारे यहाँ की रिवायत नहीं है 

 मिला कर निगाहें ,झुकाते जो गर्दन 
 वही कह रहे हैं मुहब्बत नहीं है 

 बहुत करली पहले ज़माने से हमने 
 हमें अब किसी से शिकायत नहीं है 

 करोगे घटाओं का क्या यार 'नीरज' 
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है

30 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

गहरी बातें, सरल शब्दों में

Parul Singh said...

करूँ क्या परों का अगर इनसे मुझको 
 फ़लक़ नापने की इज़ाज़त नहीं है 

 मिला कर निगाहें ,झुकाते जो गर्दन 
 वही कह रहे हैं मुहब्बत नहीं है
वाह वाह वाह कमाल शेर। बहुत अरसे बाद हुई पर खूब ग़ज़ल हुई से। और ग़ज़लों का इन्तजार रहेगा । बधाईयां।

निर्मला कपिला said...

Bahut sundar gazal

Anonymous said...

"बहुत करली पहले ज़माने से हमने
हमें अब किसी से शिकायत नहीं है"

Saurabh said...

हर शेर पर दाद कुबूल कीजिये नीरज भाईजी.. मतले से ही आपने जो माहौल बनाया है वो मक्ते तक बना रहा है. किसी एक शेर को सिंगल आउट करना इस ग़ज़ल की तौहीन होगी.
दिल की गहराइयों से उभरकर आयी इस ग़ज़ल पर बार-बार दाद कुबूल करें..

विनय (Viney) said...

सौरभ जी से पूर्णरूपेण सहमत। लिखते रहिये। खिलते रहिये।

अनुपमा पाठक said...

वाह!!!

सर्व said...

मिला कर निगाहें ,झुकाते जो गर्दन
वही कह रहे हैं मुहब्बत नहीं है

करोगे घटाओं का क्या यार 'नीरज'
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है

​बहुत खूब! बहुत बढ़िया ! ​

Mansoor ali Hashmi said...

बहुत ख़ूब नीरज जी.

हर इक मिसरा नीरज के दिल से है निकला
नही है, नही कुछ बनावत नही है.

Unknown said...

नीरज जी, सादगी में कही गई कमाल की शायरी के लिए दाद कबूल करें

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, देश का सच्चा नागरिक ... शराबी - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Parmeshwari Choudhary said...

करोगे घटाओं का क्या यार 'नीरज'
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है.....बहुत ख़ूब नीरज जी.

vijay kumar sappatti said...

is sher ne dil ko chuaa hai sri
छुपाये हुए हैं वही लोग खंज़र
जो कहते किसी से अदावत नहीं है

shukriya aapka , aap itne acche shaayar hai aur mere guru hai

सीमा रानी said...

करोगे घटाओं का क्या यार 'नीरज'
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है ........वाह ...वाह....क्या बात है ।

dr.mahendrag said...

बहुत करली पहले ज़माने से हमने
हमें अब किसी से शिकायत नहीं है

करोगे घटाओं का क्या यार 'नीरज'
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है
खूबसूरत मिसरों के साथ अच्छी ग़ज़ल ,नीरज जी बधाई

Harash Mahajan said...


करोगे घटाओं का क्या यार 'नीरज'
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है

​बहुत खूब!

तिलक राज कपूर said...

हर शेर मुकम्मल। पूरी ग़ज़ल बाक़माल। बधाइयाँ।

s.p sharma said...

NEERAJ JI MERI TARAF SE BHI DILI DAAD QUBOOL KIJIYE! IS SADHARA GHAZAL MEIN ASADHARAN SHER KAH DIYE HAIN AAPNE!''FALAQ NAAPNE KI IJAJAT NAHIN HAI''BADHAIAN!

रेखा श्रीवास्तव said...

बहुत सुन्दर ग़ज़ल ! सहज में कही गयीं गहरी बातें।

दिगम्बर नासवा said...

करूँ क्या परों का अगर इनसे मुझको
फ़लक़ नापने की इज़ाज़त नहीं है ..
अगर ये साधारण सी ग़ज़ल है तो धमाका किसे कहते हैं नीरज जी ...
बहुत ही कमाल के शेर ... सीधे दिल तक घर कर जाने वाले ...

शारदा अरोरा said...

bahut sundar ...vah

Devesh Kumar Pandey said...

"करूँ क्या परों का अगर इनसे मुझको
फ़लक़ नापने की इज़ाज़त नहीं है."

फिर से एक छटपटाहट आज महसूस हो रही हैं इन पंखों में. हम पंछी उन्मुक्त गगन के, पिंजर-बद्ध ना गा पायेंगे.

मुदिता said...

करूँ क्या परों का अगर इनसे मुझको
फ़लक़ नापने की इज़ाज़त नहीं है

पूरी ग़ज़ल ही बहुत उम्दा ... यह शेर मुझे बेहतरीन लगा ..

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

बहुत अच्छी है जी। साधारण क्यों कहते हैं?

वाणी गीत said...

जाने कितनी पीठ पर खंजर पडे हैं!
इन परों का क्या करें जो उड़ने न दें.
अच्छी लगी गज़ल.

अनुपमा पाठक said...

वाह!

Vandana Ramasingh said...

कमाल की ग़ज़ल आदरणीय

Onkar said...

बहुत सुन्दर ग़ज़ल

Asha Joglekar said...

Behad sunder.

Gajal khoobsurat ko Kahate hain sada
unhe Naz karne ki adat nahi hai.

नीरज गोस्वामी said...

Received on mail :-

Ramesh Kanwal
06:48 (1 hour ago)

to me
साधारण नहीं अच्छी ग़ज़ल है .शुक्रिया और मुबारकबाद