Monday, December 29, 2008

वो आँखें, कह देती हैं सब




कह ना पायें, जो उनके लब
वो आँखें, कह देती हैं सब

पहले तो सबका इक ही था
अब सबका अपना अपना रब

हालत तो देखो इन्सां की
खुद ही से डरता है वो अब

तनहा काटो तब पूछेंगे
होती है कितनी लम्बी शब

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

नीरज आँखें, खोलो देखो
हर सू उसके ही, हैं करतब



( गुरु देव पंकज सुबीर जी के आशीर्वाद से लिखी ग़ज़ल )

61 comments:

mehek said...

पहले तो सबका इक ही था
अब सबका अपना अपना रब

हालत तो देखो इन्‍सां की
खुद ही से डरता है वो अब

bahut sahi kaha aaj rab badal gaye sab ke,aur kartab dikhanewala bhi to wo hai,bahut achhi lagi ye gazal badhai

ताऊ रामपुरिया said...

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

बहुत खूबसुरती से सत्य कहा है आपने !

रामराम !

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह नीरज जी वाह। बहुत सुन्दर। सच कह गए।
खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब
अद्भुत।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

Very good, Neeraj ji.

Vijay Kumar Sappatti said...

neeraj ji , aapki ye gazal bhavuk kar gayi ....

कह ना पायें, जो उनके लब
वो आँखें, कह देती हैं सब
kya baat kahi hai aapne .... wah wah ... aankho ki bhasah hi to sab kuch hai sir..

तनहा काटो तब पूछेंगे
होती है कितनी लम्‍बी शब
wah , wah , jab khud par gujare to pata lage ki tanhai kya hai ...

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब
this is best ... simply superb.. wah

bahut badhai , itni achi gazal ke liye.......

aapka vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

BrijmohanShrivastava said...

नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं

गौतम राजरिशी said...

बस भी किजीये नीरज जी,अब तो शब्द-कोश भी खत्म हो गये मेरी तारीफों के....और अभी तारीफ किसकी करूँ पहले मिष्टी की आखों की,एक जबरदस्त मतले की या फिर इन तमाम शेरों की

उलझन ! उलझन !! उलझन !!!

Jyotsna Pandey said...

neeraj ji abhivadan ,

gazal bahut achchhi ban padi hai ,aur aapne apni kalam ke hunar ko bhi usakaa kartab kah kar apni namrta parichay diya .

meri shubh kamnaayen .

seema gupta said...

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब
"जितने सुंदर भाव उतने ही सुंदर शब्द और मनमोहक और मासुम चित्र..
Regards

रश्मि प्रभा said...

पहले तो सबका इक ही था
अब सबका अपना अपना रब
.......
बहुत अच्छी सच्ची बात कह दी,
बहुत अच्छी लगी

Amit said...

bahut accha ....is gazhal ko share karne ke liye bahut bahut thanks..kaafi sundar gazhal hai..

कुश said...

पहले तो सबका इक ही था
अब सबका अपना अपना रब..

एक छोटे से शेर में इतनी बड़ी बात??? ये सिर्फ़ आप ही कर सकते है..

दिगम्बर नासवा said...

नीरज जी
खूबसूरत ग़ज़ल. हर शेर बोलता हुवा
आप लिखते बहुत ही इतना अच्छा हैं. मज़ा आ जता है पढ़ कर

विनय said...

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

अति सुन्दर संशयहीन शे'र!

आशीष कुमार 'अंशु' said...

बहूत खूब ...

अल्पना वर्मा said...

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

हर शेर बहुत ही सुंदर है...
भावभरी बेहद खुबसूरत ग़ज़ल.

अनुपम अग्रवाल said...

किसी मासूम को देखा
तेरी याद आ गयी तब
हम तो इंतज़ार कर लेंगे
मिलना याद आयेगी जब

रविकांत पाण्डेय said...

एक-एक शेर में सागर की गहराई, चाँदनी की शीतलता, फूलों की मादकता और रंगों की रिमझिम बरसात नजर आती है। तारीफ़ करूँ तो कैसे करूँ, गूंगे के गुड़ सी मेरी स्थिति हो रही है।

"अर्श" said...

बहोत ही बढ़िया ग़ज़ल लिखी है आपने बहोत सुंदर ,मासूमियत भरी बिल्कुल मिष्टी की तरह मासूम ....
नीरज जी आप मेरी baaton ko अन्यथा ना ले आप तो श्रेष्ठ है मैं तो छोटा भाई हूँ आपका और आप meri गलती पे अधीकार पूर्वक कह सकते है ... बस मैं उत्तेजित हूँ अभिलाषी हूँ जानने के लिए ....आपका अनुज ........

अर्श

राज भाटिय़ा said...

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब
बिलकुल सच लिखा है आप ने बहुत सुंदर भाव लिये है आप की कविता, ओर बहुत ही सुंदर लगी मिष्टी का चित्र.
धन्यवाद

Manoshi said...

नीरज आँखें, खोलो देखो
हर सू उसके ही, हैं करतब

ye sabse acChaa lagaa.

Mumukshh Ki Rachanain said...

भाई नीरज जी,
एक बार फ़िर से कमाल कर दिया
चन्द लफ्जों में धमाल कर दिया
जिंदगी की हकीकत को सारगर्भित अंदाज़ में पेश करने का अनूठा अंदाज़ पसंद आया, पर आदत से मजबूर टिपियाने के लिए कुछ तो चाहिए ही सो पेश है आपकी ही इस ग़ज़ल के कुछ शेर कुछ इस तरह .....
अपने फ़रमाया है कि

कह ना पायें, जो उनके लब
वो आँखें, कह देती हैं सब

इसीलिये जब ये आँखे ख़ुद के भीतर ताक-झाक करती हैं तो

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब

आज जब आदमी को न कानून से डर है न किसी सख्स से और बे-शर्म सा होकर जिए जा रहा है अपने हर उस कुकर्म के साथ जिसे शायद वह स्वयं बर्दाश्त न कर पाता, ऐसे हालत में निम्न शेर कुछ पच नही पा रहा है ....

हालत तो देखो इन्‍सां की
खुद ही से डरता है वो अब

जय सिया राम जी की,

चन्द्र मोहन गुप्त

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

मिष्टी रानी बडी सयानी :)
और आपका हरेक शेर लाजवाब -
आपको २००९ के
आगामी नव -वर्ष की
बहुत शुभ कामनाएँ -
- लावण्या

Puneet Sahalot 'Ajeeb' said...

padhkar bahut achha laga...
bahut achha likha hai aapne...

"तनहा काटो तब पूछेंगे
होती है कितनी लम्‍बी शब

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब"

अक्षय-मन said...

किस शेर की तारीफ करूं समझ नही आता सभी दिल के भीतर कैद हैं और समझ भी नही आ रहा की किन शब्दों से संबोधित करूं इस बोलती आँखों के सबब को
बहुत ही अच्छा लिखा है..फ़िर से.......


अक्षय-मन

Shiv Kumar Mishra said...

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब

हमेशा की तरह शानदार!

Gyan Dutt Pandey said...

बहुत सुन्दर! और नये शब्द कहां से गढ़ें प्रशंसा में आपकी। आप तो अनूठे कवि हैं।

महेंद्र मिश्रा said...

नववर्ष की ढेरो शुभकामनाये और बधाइयाँ स्वीकार करे . आपके परिवार में सुख सम्रद्धि आये और आपका जीवन वैभवपूर्ण रहे . मंगल कामनाओ के साथ .धन्यवाद.

hem pandey said...

'खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब'

सुंदर पंक्तियाँ.

सतीश सक्सेना said...

बहुत सुंदर ! नव वर्ष की शुभकामनायें स्वीकार करें !

"अर्श" said...

आपको तथा आपके पुरे परिवार को नव्रर्ष की मंगलकामनाएँ...साल के आखिरी ग़ज़ल पे आपकी दाद चाहूँगा .....

अर्श

Dr. Amar Jyoti said...

'अब सबका अपना-अपना रब'
इतनी गहरी बात इतने कम शब्दों में!
हार्दिक बधाई।

सचिन मिश्रा said...

Bahut badiya, naye saal ki hardik subhkamnayein.

बवाल said...

नीरज आँखें, खोलो देखो
हर सू उसके ही, हैं करतब
बस यही तो रस है आपकी कविता में नीरज जी।
सदैव सुन्दर, ह्र्दय स्पर्शी ।

Dev said...

First of all Wish u Very Very Happy New Sir...

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

नीरज आँखें, खोलो देखो
हर सू उसके ही, हैं करतब

kitani gahri feelings hai ki bhav umad padete hai.. yahi aap ki kavita ki kubbi hai ki bhav jag jate hai...

Regrds..

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा िलखा है आपने । नए साल में यह सफर और तेज होगा, एेसी उम्मीद है ।

नए साल का हर पल लेकर आए नई खुशियां । आंखों में बसे सारे सपने पूरे हों । सूरज की िकरणों की तरह फैले आपकी यश कीितॆ । नए साल की हािदॆक शुभकामनाएं-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

seema gupta said...

"नव वर्ष २००९ - आप सभी ब्लॉग परिवार और समस्त देश वासियों के परिवारजनों, मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "
regards

Harkirat Haqeer said...

कुछ रहा वही दर्द का काफिला साथ
कुछ स्‍नेह भरा आप सब का सर पर हाथ
पलकें झपकीं तो देखा...
बिछड़ रहा था इक और वर्ष का साथ....

नव वर्ष की शुभ कामनायें...

तनहा काटो तब पूछेंगे
होती है कितनी लम्‍बी शब
बहूत खूब ...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

आपको एवं आपके समस्त मित्र/अमित्र इत्यादी सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎं.
ईश्वर से कामना करता हूं कि इस नूतन वर्ष में आप सबके जीवन में खुशियों का संचार हो ओर सब लोग एक सुदृड राष्ट्र एवं समाज के निर्माण मे अपनी महती भूमिका का भली भांती निर्वहण कर सकें.

tanu sharmaa said...

बहुत खूबसूरत....
नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं...

Manish Kumar said...

behad pyara likha hai aapne

सुनील मंथन शर्मा said...

bahut sundar.

vandana said...

tanha katoge to puchenge hoti hai kitni lambi shab...........jisne kati hoti hai wahi janta hai...........bahut sundar abhivyakti
HAPPY NEW YEAR

swati said...

बेटियाँ होती ही है इतनी प्यारी......आपकी अभिव्यक्ति भी बड़ी भावपूर्ण है......

COMMON MAN said...

आपके पिछले तीन लेख पढ़े, बहुत अच्छा लगा, एक बात कहना चाहता हूं, आदमी वही कहला सकता है जिसके अन्दर आदमियत हो और आदमियत केवल किताबी ज्ञान से नहीं आती, आदमी का नजरिया कैसा होना चाहिये यह आप से सीखा जा सकता है, आप मेरे ब्लाग पर आकर मुझे धन्य करते हैं.

सुनीता शानू said...

आपको व आपके परिवार को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें...

राज भाटिय़ा said...

नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!नया साल आप सब के जीवन मै खुब खुशियां ले कर आये,ओर पुरे विश्चव मै शातिं ले कर आये.
धन्यवाद

Kapil said...

नूतन वर्ष मंगलमय हो |

प्रवीण जाखड़ said...

आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं

उम्मीदों-उमंगों के दीप जलते रहें
सपनों के थाल सजते रहें
नव वर्ष की नव ताल पर
खुशियों के कदम थिरकते रहें।

Dr. Nazar Mahmood said...

नववर्ष की हार्दिक ढेरो शुभकामना

बवाल said...

"ये संसार नश्वर ज़रूर है, पर नष्ट होता नहीं। यही बीता वर्ष भी है और नव वर्ष भी यही.
न बदला है, न बदलेगा.
इसलिए वर्तमान को ही गत और नवागत मानते हुए प्रसन्नचित्त जीवन जिए जाइए ....
नव-वर्ष पर्व पर ढेर सारी बधाइयों सहित"
---समीर "लाल" और "बवाल"
http://udantashtari.blogspot.com
http://lal-n-bavaal.blogspot.com

G M Rajesh said...

happy new year to you all

मोहन वशिष्‍ठ said...

हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब

बहुत ही सुंदर कविता के लिए बारम्‍बार बधाई

प्रकाश बादल said...

नीरज भाई को नव वर्ष की शुभकामनाएं।

आपने बढ़िया ग़ज़ल लिखी है। उसके लिए अलग से ढेरों बधाई।

संदीप शर्मा Sandeep sharma said...

तनहा काटो तब पूछेंगे
होती है कितनी लम्‍बी शब

खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब

बहुत सुंदर रचना.....
भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

रविकांत पाण्डेय said...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

श्रद्धा जैन said...

itne kamaal ke sher hain ki kisi ek ho quote nahi kar paa rahi
har sher apni ek kahani kah raha hai aur dil wah wah kar raha hai

aap waqayi kamaal hai jitna padti hoon utna hi prabahvit hui jaati hoon

sandhyagupta said...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !!

अक्षय-मन said...

चरण-स्पर्श नए साल के आगमन पर बडो का आशीर्वाद
और आपको छोटों का खूब सारा प्यार.....

अक्षय-मन

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सुंदर

कह ना पायें, जो उनके लब
वो आँखें, कह देती हैं सब

Pratik Maheshwari said...

शब्दों का कितना अच्छा मेल है..
बहुत ही अच्छी ग़ज़ल..