आप सब को दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं
हर बात पे अगर वो बैठेंगे मुंह फुला कर
रूठे हुओं को कब तक लायेंगे हम मना कर
सच बोल कर सदा यूँ दिल खुश हुआ हमारा
जैसे की कोई बच्चा हँसता हो खिलखिलाकर
अपने रकीब को जब देखा वहां तो जाना
रुसवा किया गया है हमको तो घर बुला कर
पहले दिए हजारों जिसने थे घाव गहरे
मरहम लगा रहा है अब वो नमक मिला कर
गहरी उदासियों में आई यूँ याद तेरी
जैसे कोई सितारा टूटा हो झिलमिलाकर
माना हूँ तेरा दुश्मन बरसों से यार लेकिन
मेरे भी वास्ते तू एक रोज़ कुछ दुआ कर
गर खोट दिल में तेरे बिलकुल नहीं है "नीरज"
फिर किस वजह से करता है बात फुसफुसाकर
फिर किस वजह से करता है बात फुसफुसाकर

