Monday, July 5, 2010

पूजा की थाली हो गई


बात सचमुच में निराली हो गईं
अब नसीहत यार गाली हो गई

ये असर हम पर हुआ इस दौर का
भावना दिल की मवाली हो गई

डाल दीं भूखे को जिसमें रोटियां
वो समझ पूजा की थाली हो गई

तय किया चलना जुदा जब भीड़ से
हर नज़र देखा, सवाली हो गयी

कैद का इतना मज़ा मत लीजिये
रो पड़ेंगे, गर बहाली हो गयी

थी अमावस सी हमारी ज़िन्दगी
मिल गये तुम, तो दिवाली हो गयी

हाथ में क़ातिल के ‘‘नीरज’’ फूल है
बात अब घबराने वाली हो गई