
जब दिलों में रौशनी भर जायेगी
वो दिवाली भी कभी तो आएगी
खोल कर रखिये किवाड़ों को सदा
फिर खुशी ना लौट जाने पायेगी
रात की रानी सी तेरी याद है
शाम होते ही मुझे महकायेगी
तिश्नगी यारों अगर मिट जाए तो
फिर कहाँ वो तिश्नगी कहलायेगी
बेगुनाही ही तेरी, इस दौर में
इक वजह बनकर,सजा दिलवायेगी
सोच बदलो तो तुम्हारी जिंदगी
फूल खुशियों के सदा बरसायेगी
दर्द को महसूस शिद्दत से करो
दर्द में लज़्ज़त नजर आ जायेगी
गुनगुनाते हैं वही "नीरज" ग़ज़ल
बात जो दिल की ज़बाँ पे लायेगी
(नमन पंकज जी को जिन्होंने मेरी बार बार की जाने वाली गलतियों को मुस्कुराते हुए सुधारा )
