Monday, November 3, 2008

रात की रानी सी तेरी याद है



जब दिलों में रौशनी भर जायेगी
वो दिवाली भी कभी तो आएगी

खोल कर रखिये किवाड़ों को सदा
फिर खुशी ना लौट जाने पायेगी

रात की रानी सी तेरी याद है
शाम होते ही मुझे महकायेगी

तिश्नगी यारों अगर मिट जाए तो
फिर कहाँ वो तिश्नगी कहलायेगी

बेगुनाही ही तेरी, इस दौर में
इक वजह बनकर,सजा दिलवायेगी

सोच बदलो तो तुम्हारी जिंदगी
फूल खुशियों के सदा बरसायेगी

दर्द को महसूस शिद्दत से करो
दर्द में लज़्ज़त नजर आ जायेगी

गुनगुनाते हैं वही "नीरज" ग़ज़ल
बात जो दिल की ज़बाँ पे लायेगी

(नमन पंकज जी को जिन्होंने मेरी बार बार की जाने वाली गलतियों को मुस्कुराते हुए सुधारा )