
खार राहों के फूलों में ढलने लगे
याद करके तुझे हम जो चलने लगे
सब नियम कायदे यार बह जायेंगे
इश्क का गर ये दरिया मचलने लगे
दुश्मनों से निपटना तो आसान था
तीर तो अपने घर से ही चलने लगे
घोंसलों में परिंदे थे महफूज़ पर
आसमाँ जब दिखा तो उछलने लगे
बस समझना की उसकी गली आ गयी
साँस रुकने लगे जिस्म जलने लगे
दिल तो बच्चे सा सीधा लगे है मगर
हाल करता है क्या जब मचलने लगे
इतने मासूम हैं हम किसे क्या कहें
फ़िर से बातों में उनकी बहलने लगे
तेरी चाहत का मुझपे असर ये हुआ
दिल में फूलों के गुलशन से खिलने लगे
वक्त का खेल देखो तो 'नीरज' जरा
जिनकी चाहत थे उनको ही खलने लगे
