Monday, January 13, 2014

बच्चों से घर चहके यूँ

ग़ज़ल जंगल की कोयल है सर्कस की नहीं जो ट्रेनर के इशारे पे गाये सो जनाब अरसा गुज़र जाने पे भी जब कोई ग़ज़ल नहीं हुई तो मैं परेशान नहीं हुआ फिर अचानक ज़ेहन कि मुंडेर पे ये कोयल बैठी दिखी जिसने मुश्किल से एक तान लगाईं और फुर्र हो गयी. जैसी भी है, उसी तान को आपके साथ बाँट रहा हूँ बस।



अब रिश्तों में गहराई ? 
बहते पानी पर काई ? 

तुम कमरों में बंद रहे 
धूप नहीं थी हरज़ाई 

तुमसे मिल कर देर तलक 
अच्छी लगती तन्हाई 

बच्चों से घर चहके यूँ 
ज्यूँ कोयल से अमराई 

लाख बुराई हो जिसमें 
ढूंढो उसमें अच्छाई 

तन्हा काली रातों की 
बढ़ती क्यूँ उफ़ ! लम्बाई 

बीती बात उधेड़ो मत 
'नीरज' सीखो तुरपाई

33 comments:

Majaal said...

छोड़ी बहर में नीरज
गहरी बातें भर आई :)

लिखते रहिये। .

Parmeshwari Choudhary said...

तुम कमरों में बंद रहे ,धूप नहीं थी हरज़ाई.... बहुत खूब

संजय भास्‍कर said...

तन्हा काली रातों की
बढ़ती क्यूँ उफ़ ! लम्बाई
वाह बहुत ही खूबसूरत |

दिगम्बर नासवा said...

बेहतरीन शेरों का गुलदस्ता है ये गज़ल ... फुदकती हुई कोयल की तरह ... लाजवाब नीरज जी ...

Rajendra kumar said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,लोहड़ी कि हार्दिक शुभकामनाएँ।

Parul Singh said...

ज़ेहन की मुंडेर पे बैठ कोयल ने बड़ी सुरीली तान छेड़ी।
ग़ज़ल हुई और बाकमाल हुई। बधाई हो सर।

रश्मि प्रभा... said...

http://bulletinofblog.blogspot.in/2014/01/blog-post_13.html

vandan gupta said...

bahut sundar gazal

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुंदर !

Asha Joglekar said...

Bahut hee badhiya> Aakhri wala to behad bhaya.

Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

सर, इन दिनों कुछ फुर्सत में हूँ सो फिर से ऑनलाइन पठन पाठन टिपियाना तेज हो गया है.…
लाख बुराई हो जिसमें
ढूंढो उसमें अच्छाई
तन्हा काली रातों की
बढ़ती क्यूँ उफ़ ! लम्बाई
बीती बात उधेड़ो मत
'नीरज' सीखो तुरपाई

वाह… !! बहुत सुन्दर। । पूरी ग़ज़ल ही कामयाब हुयी है. सभी शे'र जबरदस्त हैं !!

www.navincchaturvedi.blogspot.com said...

छोटी बह्र पर अच्छा काम है नीरज साहब, बहुत-बहुत बधाई। तुससी ग्रेट हो सर जी।

Misra Raahul said...

काफी उम्दा प्रस्तुति.....
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (14-01-2014) को "मकर संक्रांति...मंगलवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1492" पर भी रहेगी...!!!
- मिश्रा राहुल

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

छोटी बहर में शानदार,सुंदर प्रस्तुति...!

RECENT POST -: कुसुम-काय कामिनी दृगों में,

Shiv said...

बहुत खूब!

Mansoor ali Hashmi said...

हर मिसरे ने 'कूक' सुनाई,
'नीरजी' रंग में इतराई,
क्या खूब ग़ज़ल है गाई।
लो ! कोयल भी शरमाई।
http://mansooralihashmi.blogspot.com

कालीपद "प्रसाद" said...

छोटी है ,नटखट है ,बुलन्द आवाज है |
मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं !
नई पोस्ट हम तुम.....,पानी का बूंद !
नई पोस्ट बोलती तस्वीरें !

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

सीखो तुरपाई :-)

Neeraj Neer said...

बहुत खूब ग़ज़ल हुई है .. बधाई ..

तिलक राज कपूर said...

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल
है

शेर किये ऐसे पैदा
जैसे नीरज हो दाई।
लंबी बातों पर भारी
प्रेम भरे अक्षर ढाई।

Kailash Sharma said...

तुम कमरों में बंद रहे
धूप नहीं थी हरज़ाई
...वाह...क्या बात है...बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

Vaanbhatt said...

कोयल की प्राकृतिक कूक सराहनीय है...बेहद सुंदर ग़ज़ल...

Vandana Ramasingh said...

तुम कमरों में बंद रहे
धूप नहीं थी हरज़ाई
बीती बात उधेड़ो मत
'नीरज' सीखो तुरपाई

वाह आदरणीय नीरज जी बहुत खूब

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बीती बात उधेड़ो मत,
नीरज सीखो तुरपाई!!
क्या बात कही है.. छोटे बहर में एक बेहतरीन ग़ज़ल!! एक एक शे'र लाजवाब!!

नीरज गोस्वामी said...

Received on e-mai:-

अति सुंदर!

Sarv Jeet Sarv
Delhi

प्रवीण पाण्डेय said...

अब जीवन में तुरपाई ही सीख रहे हैं

SATISH said...

Waaaaah kya kahney bahut khoob Neeraj Ji....

"लाख बुराई हो जिसमें
ढूंढो उसमें अच्छाई"

Satish Shukla 'Raqeeb'

'MP' said...

बढ़िया है बॉस!

नीरज गोस्वामी said...

Received on e-mail:-

Waah
Chha gaye janab.

RAMESH SACHDEVA
(Principal)
HPS SENIOR SECONDARY SCHOOL,
SHERGARH (M.DABWALI)-125104
DIST. SIRSA (HARYANA) - INDIA

नीरज गोस्वामी said...

Received from mail:-

Beautiful...

Rahul

Sent from my iPhone
Newzealand

नीरज गोस्वामी said...

Received on mail:-

bhai neeraj ji

namsty

bhut achhi gazal hai

khastor par yeh lines--


तुमसे मिल कर देर तलक

अच्छी लगती तन्हाई




बच्चों से घर चहके यूँ

ज्यूँ कोयल से अमराई




लाख बुराई हो जिसमें

ढूंढो उसमें अच्छाई

badhai-

om sapra

Delhi

Onkar said...

वाह, बहुत सुन्दर

अनिल जनविजय said...

बीती बात उधेड़ो मत
'नीरज' सीखो तुरपाई ।
वाह ! क्या बात है!