Monday, November 1, 2010

चाँद छुपे जब बदली में

(आज की मेरी ये ग़ज़ल मैं हर दिल अज़ीज़ शायर और मेरे बड़े भाई समान जनाब जाफ़र रज़ा साहब को समर्पित कर रहा हूँ जो अचानक हमें और अपने सभी चाहने वालों को मंगलवार छब्बीस अक्टूबर को बिलखता छोड़ कर चले गए. उन जैसा ज़िंदा-दिल इंसान और बेहतरीन शायर दूसरा ढूँढना मुश्किल है. सिर्फ दो दिन पहले रविवार की रात को उनके साथ शिरकत किये मुशायरे की याद हमेशा दिल में ताज़ा बनी रहेगी. खुदा उस नेक रूह को करवट करवट ज़न्नत नसीब करे.)



तन्हाई में गाया कर
खुद से भी बतियाया कर

हर राही उस से गुज़रे
ऐसी राह बनाया कर

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

चाँद छुपे जब बदली में
तब छत पर आ जाया कर

जिंदा गर रहना है तो
हर गम में मुस्काया कर

नाजायज़ जब बात लगे
तब आवाज़ उठाया कर

मीठी बातें याद रहें
कड़वी बात भुलाया कर

‘नीरज’ सुन कर सब झूमें
ऐसा गीत सुनाया कर


(परम आदरणीय गुरु प्राण शर्मा जी की रहनुमाई में कही ग़ज़ल )

51 comments:

नीरज जाट जी said...

आपके माध्यम से हम भी शायरों के नाम और शायरी पढ लेते हैं, नहीं तो कसम से शायरी पल्ले ही नहीं पडती।
ऊपर वाला ज़ाफ़र रज़ा साहब की आत्मा को शान्ति दे।

Majaal said...

जिंदगी का यही तरीका,
मौत को भुलाया कर ...

राजा साहब की आत्मा को शांति मिलें ....

vishal said...

अल्ला तआला उनकी रूह को जन्नत बख्शे।

योगेन्द्र मौदगिल said...

wah bhai ji wah....kya sher nikale hain....mazaa aa gaya.....

raza saheb ki aatma ko shanti mile yahi kamna hai...

इस्मत ज़ैदी said...

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर


मीठी बातें याद रहें
कड़वी बात भुलाया कर

neeraj ji ,
bahut badhiya ,bas isee bhaavanaa ki zaroorat hai ,

khuda jafar sahab marhoom ko jannat naseeb kare ,aur un ke mutaalaqen ko sabr ata farmae

राजेश उत्‍साही said...

रज़ा जी की रूह को सुकून मिले।

वन्दना said...

रज़ा साहब की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करे।
आपकी हर नज़्म मे कुछ ऐसा होता है जो सीधा दिल मे उतर जाता है……………आभार्।

M.A.Sharma "सेहर" said...

Har sher Umda ! ati sundar !

संजय भास्कर said...

हर बार की तरह शानदार प्रस्तुति

प्रवीण पाण्डेय said...

आपने कविता जी ली, सच में झुमा दिया।

kshama said...

Razaa sahab kee rooh ko sukoon mile.Aapkee rachanake bareme to kya kahen?

सुज्ञ said...

नीरज जी,

अभिभुत हो गया, शब्दों की आभा!!

हर राही उस से गुज़रे
ऐसी राह बनाया कर

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

शारदा अरोरा said...

बहुत सुन्दर लिखा है , छोटी बहर में , क्या कहने ...

इमरान अंसारी said...

मरहूम शायर जाफ़र रज़ा साहब को खुदा जन्नतनशीं करे.....आमीन

बहुत खुबसूरत ग़ज़ल लिखी है आपने...ये शेर बहुत पसंद आये.....

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

नाजायज़ जब बात लगे
तब आवाज़ उठाया कर

मीठी बातें याद रहें
कड़वी बात भुलाया कर

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Bahut khoob, bahut khoob, bahut khoob.

---------
मन की गति से चलें...
बूझो मेरे भाई, वृक्ष पहेली आई।

राज भाटिय़ा said...

खुब सुरत गजलो के लिये आप का धन्यवाद

shikha varshney said...

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

क्या बात कही है .आज इसी की सबसे ज्यादा जरुरत है .
राजा साहब की आत्मा को शांति मिले.

ताऊ रामपुरिया said...

बेहद खूबसूरत रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

निर्मला कपिला said...

हर राही उस से गुज़रे
ऐसी राह बनाया कर

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

ज़िन्दा गर रहना है त
हर गम मे मुस्काया कर
नीरज जी आपकी गज़ल के क्या कहने हर एक शेर गज़ब है।
शायर जाफ़र रज़ा साहब के बारे मे जान कर बहुत दुख हुया\ भगवान उनकी आत्मा को शान्ति दे।

jogeshwar garg said...

वाह !
बहुत सुन्दर, सरल एवं सरस ग़ज़ल !

"नीरज" ऐसे ही लिख कर
अपना इल्म नुमायाँ कर

शुभ कामनाएं !

तिलक राज कपूर said...

एक खूबसूरत ग़ज़ल और एक दु:खभरी खबर।
जाफ़र रज़ा साहब की रूह को खुदा जन्नतनशीं करे...आमीन
शायर जब दिल से उतरता है तो छोटी बह्र में भी क्‍या खूबसूरत बातें कह जाता है। आपसे आपके अंदर बैठा शायर जरूर कहता होगा कि:
सीधे सादे लफ़्जों को
ग़ज़लों में बहलाया कर।
तभी सीधे सादे शब्‍दों में आप इतनी खूबसूरत ग़ज़ल कह जाते हैं।

तिलक राज कपूर said...

सीधे सादे लफ़्जों को
ग़ज़लों में बहलाया कर।
नहीं
सीधे सादे लफ़्जों को
ग़ज़लों में अपनाया कर।
त्रुटि हो गयी।

Mansoor Ali said...

अच्छी ग़ज़ल कही नीरज जी, रज़ा साहब को बतौर खिराजे अकीदत.
"रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर."
ये शेर ख़ास पसंद आया.

छोटी बहर में शेर कहना वाकई मुश्किल है. मैं तो चार लाईनों में भी कामयाब नहीं हो पा रहा हूँ.

ख़ुद को मत भरमाया कर,
मत ऐसे शरमाया कर,
आना है तो आ भी जा,
न-न, ना फरमाया कर.
-----------------------------
तन्हा ही तू आया कर,
सींग-चने भी लाया कर,
pet तेरा प्यारा लेकिन
पेट मेरा गरमाया कर.
------------------------

डॉ टी एस दराल said...

जिंदा गर रहना है तो
हर गम में मुस्काया कर

नाजायज़ जब बात लगे
तब आवाज़ उठाया कर

जिन्दगी की ऊँचाई नज़र आ रही है इन पंक्तियों में ।
रज़ा साहब की याद में बहुत खूबसूरत ग़ज़ल लिखी है नीरज जी ।

Sunil Kumar said...

नाजायज़ जब बात लगे
तब आवाज़ उठाया कर
खूबसूरत ग़ज़ल

anitakumar said...

जाफ़र रजा? सानपाड़ा वाले ? अरे! भगवान उनकी आत्मा को शांती दे।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

apni hi ek ghazal

tanhai ko tata kar
kuch to sair sapata kar

yaad aa gayi

behad khubsurat matle se shuru hoti ghazal hai neeraj sir

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

bahut hi zabardast aur sadhi hui zabaan ke sath kaha sher hai ...craft ki khubsurti dekhte hi banti hai

aur yahi sher sabse achha bhi laga .... :)

गिरीश बिल्लोरे said...

इस्मत जी की तरह मेरी भी सोच है
बधाईयां स्वीकारिये
_________________________________
एक नज़र : ताज़ा-पोस्ट पर
पंकज जी को सुरीली शुभ कामनाएं : अर्चना जी के सहयोग से
पा.ना. सुब्रमणियन के मल्हार पर प्रकृति प्रेम की झलक
______________________________

मो सम कौन ? said...

"जिंदा गर रहना है तो
हर गम में मुस्काया कर"

नीरज साहब, बहुत खूबसूरत गज़ल लगी।

जाफ़र रज़ा साहब की रूह को सुकून मिले।

Udan Tashtari said...

राजा साहब की आत्मा को शांति मिलें..श्रद्धांजलि!!

Arvind Mishra said...

राजा साहब को श्रद्धांजलि

सुशीला पुरी said...

चाँद छुपे जब बदली में
तब छत पर आ जाया करना!!!
..................
रजा साहब की यादों को !!!!!!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

जिंदा गर रहना है तो
हर गम में मुस्काया कर
ज़िन्दाबाद...नीरज जी, हौसला देने वाला शेर
नाजायज़ जब बात लगे
तब आवाज़ उठाया कर
इंसाफ़ का तकाज़ा तो यही है...
छोटी बहर में मुकम्मल ग़ज़ल पेश की है...वाह.
जनाब जाफ़र रज़ा साहब को खिराज़े-अक़ीदत.

नीरज गोस्वामी said...

इ-मेल से प्राप्त कमेन्ट:-

नीरज भाई,हमेश की तरह एक और उम्दा ग़ज़ल छोटी बहर की.
धन्यवाद और स्वागत /
Dr.Bhoopendra Singh
T.R.S.College,REWA 486001
Madhya Pradesh INDIA

दिगम्बर नासवा said...

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

चाँद छुपे जब बदली में
तब छत पर आ जाया कर

राजा साहब को श्रद्धांजलि ... बहुत ही लाजवाब शेर हैं ... इससे बढ़ कर एक शाएर को क्या श्रधांजलि हो सकती है ...

मेरे भाव said...

मीठी बातें याद रहें
कड़वी बात भुलाया कर

bahut hi meethe sher hain

Kailash C Sharma said...

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर...

बहुत ही सुन्दर गज़ल...आज इसी भावना की बहुत आवश्यकता है...आभार

girish pankaj said...

vaah-vaah...har sher dil ko chhoo gayaa. kamaal karate rahate hain aap bhi...badhai. chhotee bahar mey likhi gaee badee ghazal...shubh deepavalee.

DEEPAK BABA said...

‘नीरज’ सुन कर सब झूमें
ऐसा गीत सुनाया कर



ऐसे ही गीत सुनाया कीजिए.........
क्या है की इस दुनिया में कुछ और नहीं है........

अरुण चन्द्र रॉय said...

आपने ही कभी कहा था.. छोटी बहर में ग़ज़ल कहना सबके बस की बात नहीं... आज आपकी छोटी बहर की ग़ज़ल देख मन को अच्छा लगा.. सुन्दर ग़ज़ल हैं.. दिल और दुनिया के करीब..

जी.के. अवधिया said...

दीपावली के इस शुभ बेला में माता महालक्ष्मी आप पर कृपा करें और आपके सुख-समृद्धि-धन-धान्य-मान-सम्मान में वृद्धि प्रदान करें!

BrijmohanShrivastava said...

आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत सुन्दर रचना है !
आपको और आपके परिवार को एक सुन्दर, शांतिमय और सुरक्षित दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें !

BrijmohanShrivastava said...

आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

Manoj K said...

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

रिश्तों कि गर्माहट आज के युग कि आवश्यकता है..

आपको दीपोत्सव कि हार्दिक शुभकामनाएँ.

डॉ० डंडा लखनवी said...

सराहनीय लेखन........हेतु बधाइयाँ...ऽ. ऽ. ऽ
चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
मंगलमय हो आपको, सदा ज्योति का पर्व॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

नीरज जी,
खूबसूरत गज़ल के लिये बधाई........भावपूर्ण अभिव्यक्ति........दीपावली की शुभकामनाएं......

विनोद कुमार पांडेय said...

नीरज जी..छोटे मिसरे की इस ग़ज़ल की जितनी तारीफ करूँ कम है..बहुत सुंदर ग़ज़ल..बढ़िया लगी...बहुत बहुत बधाई

Mrs. Asha Joglekar said...

Najayaj jab bat lage
tab aawaj uthaya kar

Jinda gar rahana hai to
har gam men muskaya kar

Kafee mushkil par jaroori baten itanee khoobsoorati se aap hee bayan kar sakte hain.

Shiv said...

बहर छोटी हो या बड़ी हो, आपकी ग़ज़ल कमाल होती है.
यह भी है.

रचना दीक्षित said...

रज़ा साहब की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करे।
सुन्दर ग़ज़ल हैं बधाईयां स्वीकारिये