Sunday, September 5, 2010

मेघ छाएं तो मगन हो नाचता

मेरी दो सौ वीं पोस्ट के साथ ही आज ब्लॉग के तीन साल भी पूरे हुए....आज ये गीत गाने का मन कर रहा है: --

"मुझे ख़ुशी मिली इतनी कि मन में ना समाय, पलक बंद कर लूं कहीं छलक ही ना जाये"

ये ख़ुशी बिना आप सब के सहयोग के मिलनी असंभव थी. तो आप सबको तहे दिल से शुक्रिया मेहरबानी करम....



झूम कर आई घटा घनघोर है
डर रहा हूँ घर मेरा कमज़ोर है

मेघ छाएं तो मगन हो नाचता
आज के इन्‍सां से बेहतर मोर है

चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है

फासलों से क्‍यों डरें हम जब तलक
दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है

जिंदगी में आप आये इस तरह
ज्यूँ अमावस बाद आती भोर है

इस जहाँ में तुम अकेले ही नहीं
हर किसी के दिल बसा इक चोर है

बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है


(इस ग़ज़ल के सिर्फ लफ्ज़ मेरे हैं, करिश्मा गुरुदेव पंकज सुबीर जी का है)

68 comments:

वन्दना said...

सबसे पहले तो 3 साल पूरे करने के लिये हार्दिक बधाई ………………ऐसे ही साल दर साल सफ़र चलता रहे।

गज़ल का हर शेर हमेशा की तरह नायाब है।

पारूल said...

बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है
:)

मुबारक नीरज जी ,
सफ़र जारी रहे
शुभकामनायें

इस्मत ज़ैदी said...

नीरज जी ,
बहुत उम्दा ग़ज़ल ,एक हस्सास मतले से शुरूआत और जैसे जैसे क़ारी आगे बढ़ता है समाजी और नाज़ुक अफ़्कार की परतें खुलने लगती हैं ,
हर शेर अपनी बात बिल्कुल साफ़ साफ़ और नफ़ासत से कह रहा है ,इस लिए किसी एक शेर का चुनाव नहीं कर सकती मैं तारीफ़ के लिये

बहुत बहुत मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं

इस्मत ज़ैदी said...

सोचा था सब से पहले ब्लॉग की सालगिरह की बधाई दूंगी लेकिन ग़ज़ल पढ़ने के बाद भूल ही गई
एक बात और मक़ता भी बहुत उम्दा है

Shiv said...

क्या कहूँ? आपकी हर ग़ज़ल ज़िन्दगी जीने के लिए बहुत कुछ सिखाती है.

बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है

तीन वर्ष हो गए ब्लॉग लिखते हुए. ऐसे ही और न जाने कितने वर्ष बीतें, यही कामना है. याद भी आया वह दिन जब आपका ब्लॉग बना था.

Majaal said...

सालों यहाँ बस वही टिकते है 'नीरज',
सोच में बूता, जिनकी कलम में जोर है !

DEEPAK BABA said...

जिंदगी में आप आये इस तरह
ज्यूँ अमावस बाद आती भोर है


नीरज कि.........
ब्लॉग्गिंग के बेहतरीन ३ साल पुरे होने कि बधाई हो
पोस्टों का दोहरा शतक ज़माने कि बधाई ही......


और इस अमावस के बाद अआती भोर का भी स्वागत है.

DEEPAK BABA said...

और हाँ

ये "ना भूतो ना भविष्यति..." के चक्कर में अपन ने क्लास में मार भी खाई है............. एक बड़ा पोस्टर लगा दिया था...........

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

आदरणीय नीरज जी, आदाब
आज हम सबके लिए कितनी खुशी का दिन है...
शिक्षक दिवस के इस अवसर पर सबके चहेते श्रद्धेय नीरज गोस्वामी जी के ब्लॉग लेखन के तीन साल पूरे होने...(वो भी 200 पोस्ट के साथ) का सुखद संयोग बना है...बधाई
और हां ये सब आपके बेहतर लेखन से ही संभव हो पाया है...ये सिलसिला यूं ही चलता रहे...आप लिखते रहें...और हम पढ़ते रहें...आमीन
(ग़ज़ल बहुत अच्छी है, विस्तृत टिप्पणी बाद में)

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ब्लॉग जगत में तीन साल और दो सौंवी पोस्ट के लिए बधाई ...यह सफर निरंतर चलता रहे ...

गज़ल बहुत शानदार है ..

अनिल कान्त : said...

बधाई हो तीन बरस होने पर....ग़ज़ल पढ़कर आनंद आया

अर्चना तिवारी said...

बहुत-बहुत बधाई...ब्लॉग के तीन वर्ष, दो सौवीं पोस्ट एवं बेहतरीन ग़ज़ल के लिए

Rohit Jain said...

Kya baat hai sirji.... maza aa gaya padh ke

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब, शुभकामनाएं.

रामराम.

दिगम्बर नासवा said...

चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है...

३ साल ... दो सौवि पोस्ट ..... और इस लाजवाब ग़ज़ल का तोहफा .... जवाब नही नीरज जी आपका .... अच्छा लिया शिक्षक दिवस पर ये ग़ज़ल लगाई ... आपसे उस्तादों से बहुत कुछ सीखने को मिल जाता है ....

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय भाई साहब नीरज गोस्वामी जी
प्रणाम !

अंतर्जाल पर तीन वर्ष पूर्ण होने एवम् पोस्टों का दोहरा शतक पूरा करने पर बहुत बहुत बधाइयां ! शुभकामनाएं !! मंगलकामनाएं !!!

यह अवसर ही इतना ख़ास है कि बस यही कहने को मन है बार बार … बधाई ! बधाई ! बधाई ! बधाई ! बधाई ! बधाई ! बधाई ! बधाई ! बधाई !

… और बधाई !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

…और एक बार फिर बधाई !
:)


- राजेन्द्र स्वर्णकार

काजल कुमार Kajal Kumar said...

ढेरों बधाइयां.

shikha varshney said...

बहुत बहुत बधाई आपको ..ये सफर निरंतर यूँ ही सार्थकता से चलता रहे अनगिनत शुभकामनाये आपको.

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
कल (6/9/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Vijay Kumar Sappatti said...

sir
aapko is post ke liye badhayi .. is gazal ke liye badhayi , itne baras blogging me rahe , iske liye badhayi ..

gazal ki tareef kya karu.. its all time best of you .

sir aur likhiye , bas yahi dua hai , ham par aapka pyaar aur aashirwad bana rahe..

aapka

vijay

महेन्द्र मिश्र said...

२००वी, पोस्ट पर बधाई ....बहुत बढ़िया प्रस्तुति ...
आपकी आज चर्चा समयचक्र पर...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

नीरज जी,
आपके तीन साल का उपलब्धि ई दू सौ पोस्ट नहीं है, ऊ साहित्य का बिसेस संसार है जो आप हमलोग के इर्द गिर्द बसाए हैं, एतना सुंदर गजल अऊर समीच्छा लिखकर... हमरे तरफ से बहुत बहुत बधाई...ई गज़ल के बारे में त एक्के बात कहेंगेः
लफ्ज़ नीरज के हों या पंकज के हों
आज तो हर हर शेर पे ‘वंस मोर’ है.

सलिल

डॉ टी एस दराल said...

तीन साल और २०० पोस्ट्स ! बहुत खूब नीरज जी ।
बहुत बहुत बधाई । आप यूँ ही ग़ज़लों की बरखा करते रहें । हमारा भी मन मोर नाचता रहेगा । आभार इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए ।

Mansoor Ali said...

दो शतक, सह* साल,नॉट आउट अभी, [*३]
बात में दम है क़लम में ज़ोर है.
मेघ से मोरो का रिश्ता जोड़ती,
इस ग़ज़ल से मन* बने सब मोर है. [ब्लागर्स के]

हार्दिक बधाई नीरज जी, अल्लाह करे ज़ोरए क़लम और ज़्यादा.

anitakumar said...

्शुक्रगुजार तो हम हैं कि आप पिछले तीन सालों से एक से बढ़ कर एक गजलें हमें दे रहे हैं जिन में जिन्दगी का फ़्लसफ़ा छुपा होता है।
ब्लोग को तीसरे जन्म दिन की बधाई और आप को दौ सौ पोस्ट पूरी करने की अनेकों बधाइयां

सुशीला पुरी said...

मेघ छाएं तो मगन हो नाचता
आज के इन्‍सां से बेहतर मोर है
............
लाजवाब लिख दिया आपने !
बहुत बहुत बधाई ! यूँ ही आप की कलम चलती रहे,ईश्वर से यही प्रार्थना है ।

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) said...

दो सौवीं पोस्ट और तीन साल ...मै कहा था अब तक???? क्षमा प्रदान करते हुए मेरी भी बधाई कबूल करें|
ब्रह्माण्ड

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत बहुत बधाई इस उपलब्धि के लिये।

राजेश उत्‍साही said...

नीरज जी 200 बधाईयां और 1000 से ऊपर शुभकामनाएं। पंकज जी आपकी रचना को जो रूप देते हैं,वह बहुत अच्‍छा है। मेरा सुझाव है जिस रचना में उनका सहयोग मिले उसमें अगर आप अपनी मूल रचना भी यहां ब्‍लाग पर साथ में दें तो लिखने वालों को उससे बहुत मदद मिलेगी सीखने में। मेरा ख्‍याल है कि यह एक नया प्रयोग भी होगा।
गज़ल़ के व्‍याकरण से मेरा ज्‍यादा परिचय नहीं है। एक-दो किताबें भी लीं पर उनसे बहुत कुछ पल्‍ले नहीं पड़ा। इसलिए समझने की जिज्ञासा लगातार बनी रहती है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (ਦਰ. ਰੂਪ ਚੰਦ੍ਰ ਸ਼ਾਸਤਰੀ “ਮਯੰਕ”) said...

बहुत-बहुत बधाई!
--
भारत के पूर्व राष्ट्रपति
डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिन
शिक्षकदिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

विवेक सिंह said...

दोनों चीजों की बधाई स्वीकारें ।

हमें आपकी कविताएं अच्छी लगती हैं

दीपक 'मशाल' said...

triple century percent बधाई सर... २०० वीं पोस्ट, ३ साल का ब्लॉग लिखने का अनुभव और एक और खूबसूरत ग़ज़ल... :)

Udan Tashtari said...

तीन साल, दो सौ पोस्ट...बेहतरीन आंकड़ा...बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ...

आपकी एक एक पोस्ट १० के बराबर सर जी ...२००० पोस्ट का आंकड़ा है हमारे लिए तो यह..उसमें भी हम आप सी महारत हासिल कर लें तो धन्य हो जायेंगे.

जारी रहें.

महफूज़ अली said...

सबसे पहले तो आपको दो सौवीं पोस्ट और तीन साल पूरे करने के लिए बहुत बहुत बधाई.... ग़ज़ल हर बार की तरह बेहतरीन.... और बहुत ही खूबसूरत अश'आर हैं....

किलर झपाटा said...

बहुत बहुत बधाई आपको इस उपलब्धि के लिए। बहुत सुन्दर रचना लगी।

सुलभ § Sulabh said...

ब्लॉगजगत में तीन साल और दो सौंवी पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई ...
अभी पिछले साल दो वर्ष पुरे होने पर आपसे ये सिलसिला और सम्बन्ध पुख्ता हुआ है, यह आनंद का सफर चलता रहे.

इस मौके पर जो ग़ज़ल आई है वो महान रचनाओं में शुमार करने योग्य है. सच में किस शेर की तारीफ़ करूँ.
झूम कर आई घटा घनघोर है
डर रहा हूँ घर मेरा कमज़ोर है
बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है

नीरज गोस्वामी said...

E-mail received from Dr. Bhupendra Singh:-

नीरज भाई,आपकी लेखनी भी बस कमल करती है /वेर्षा केअगमन पर कमजोर घर उस आनंद को सीमित करदेता है ,वाकई ,बहुत सूक्ष्म दृष्टि है कवि की/मनुष्य मोर से भी कमजोर हो गया है संवेदनाओं की बात करें तो /
आनंद के लिए धन्यवाद ,आभार,
सादर,सस्नेह
Dr.Bhoopendra Singh
T.R.S.College,REWA 486001
Madhya Pradesh INDIA

इमरान अंसारी said...

नीरज जी,

इतने लम्बे सफ़र के लिए मुबारकबाद.....

"चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है"

सुभानाल्लाह .....बहुत ही खुबसूरत शेर है.....

vishal said...

फासलों से क्‍यों डरें हम जब तलक
दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है...

वर्षों की हैट्रिक और ब्लॉगों के दोहरे सैकडे की बधाई हो अंकल जी। आप वीणा के सुर, रेखा श्रीवास्तव आंटी जी, कंचन चौहान जी ब्लॉग के माध्यम से संपर्क में आए महानुभाव हैं। आपका लेखन बहुत ही सुकून देता है।

upendra said...

bahoot hi sunder. aapki double century par taliyan.

Himanshu Mohan said...

नीरज साहब, बधाई!
बधाई तीन साल के लिए या दो सौवीं पोस्ट के लिए नहीं - आपकी सार्थक और स्तरीय उपस्थिति के लिए है।
अल्फ़ाज़ भी आपके हैं और ग़ज़ल भी आपकी ही। आप कहते हैं कि यह पंकज सुबीर जी की कृति है - तो बात अति विनम्रता की होगी या फिर टीचर्स-डे पर समर्पण। इस्लाह तो ख़ैर हो सकती है।
आपको बहुत-बहुत बधाई, सार्थकता और सहजता सहित अनवरत प्रवाहित सहृदयता के लिए। और समर्पित हैं यह पंक्तियाँ-
माँ के आँचल का सरकता छोर है
चमकती आँखें हैं, भीगी कोर है

जो कला-साहित्य-रस समझा नहीं
कब मनुज? ज्ञानी कहें वो ढोर है

मुझको चाहें ख़ुदसे जो करना जुदा
आजकल हर सू उन्हीं का ज़ोर है
------------------------------
देख मेरी शायरी भी 'प्योर' है
इसका 'हिट' होना यक़ीनन 'श्योर' है
-----------------------------
बरसाती मौसम में हम भी टर्रा लिए…

डॉ .अनुराग said...

के किसी रोज किसी ख्याल को यूँ ही लिखा था .....सोचा न था खपोली में दूर बैठा कोई शख्स ऐसे जुड़ जाएगा ....हमें तो इस बात पे यकीन हुआ है के व्यस्त दुनिया में भी कुछ लोग इस की सांसो को चलाये हुए है.....अपनी अच्छाईया बरकरार रखे.......आप उनमे से एक है .
राईट साइड में हमारी नन्ही परी बढ़ी हो गयी है .....खुदा दोनों छोटो को खुश रखे ..आमीन!!!

संजीव गौतम said...

झूम कर आई घटा घनघोर है
डर रहा हूँ घर मेरा कमज़ोर है


मेघ छाएं तो मगन हो नाचता
आज के इन्‍सां से बेहतर मोर है

चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है

फासलों से क्‍यों डरें हम जब तलक
दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है

apni pasand ke ashaar chunkar le ja raha hoon. aabhar sahit

Manish Kumar said...

badhai ji yoon hi ghazalein rachte rahein aur pustakon se deedaar karate rahein.

Mumukshh Ki Rachanain said...

******************************
साल केवल तीन और पोस्ट दो सौ...........................
बहुत बे-इंसाफी है हम ब्लागरों के साथ...................

उठाना तो ज़रा 'की बोर्ड', इक बार और टिपिया दे..............
******************************

तीन साल में पोस्ट की इस 'डबल सेंचुरी' पर तहे दिल से हार्दिक बधाई.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

Pratik Maheshwari said...

बधाई हो.. ३ साल पूरे होने पर..
कविता भी बहुत अच्छी है..
आगे आने वाले सालों के लिए भी शुभकामनाएं.. मार्गदर्शन देते रहे...

PRAN said...

NEERAJ BHAI,BLOG KEE TEESREE
VARSHGAANTH PAR AAPKO DHERON
BADHAAEEYON KE SAATH - SAATH
NAANAA SHUBH KAAMNAAYEN BHEE.
AAPKEE TAAZAA GAZAL NE DIL MEIN
TAAZGEE BHAR DEE HAI.

विनोद कुमार पांडेय said...

नीरज जी...ब्लॉगिंग के तीसरे वर्षगाँठ पर बहुत बहुत बधाई...आप ऐसे ही निरंतर सफलता के शिखर को प्राप्त होते रहे..
आपके अंदाज के साथ साथ ग़ज़लों और किताबों की दुनिया का एक खास प्रस्तुतिकरण भी है जो लोगो को बहुत भाता है...इसके लिए हार्दिक बधाई..

आज भी क्या सुंदर शेर गढ़े आपने...बधाई हो नीरज जी

Shah Nawaz said...

नीरज जी,

चलिए जीवन का एक और पड़ाव पूरा हुआ.... बेहद कामयाबी के साथ.... दो सौ वीं पोस्ट के साथ ही ब्लॉग जगत में पूरे तीन साल पुरे होने पर यानी डबल-डबल कामयाबी पर बहुत-बहुत बधाई!

जबसे आपको जाना है, तभी से आपके मार्गदर्शन का अभिलाषी रहा हूँ.

शाहनवाज़ सिद्दीकी

singhsdm said...

पूरा सुबीर गुरुकुल जब सावन के महीने में झूम रहा है, तो ऐसे में इस ग़ज़ल का आना लाजिमी था .....
झूम कर आई घटा घनघोर है
डर रहा हूँ घर मेरा कमज़ोर है
बहुत खूब क्या मतला बंधा है......

मेघ छाएं तो मगन हो नाचता
आज के इन्‍सां से बेहतर मोर है
क्या तुलना की है.... हमारा मन तो मोर हो गया....!

चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है
बात तो सच है....अल्फाजों में बहुत खूबसूरती से बाँधा है....भाई वाह....!

फासलों से क्‍यों डरें हम जब तलक
दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है
ये शेर तो हासिले ग़ज़ल है बार बार दोहराने वाला शेर....बल्कि कहूं तो कोट करने लायक शेर.....!

बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है
मतला बहुत ही दमदार .....पूरी ग़ज़ल दाद की हकदार है......क़ुबूल करें !

Kusum Thakur said...

बहुत बहुत बधाई !!....ऐसे ही सालों आप इस सफ़र पर अग्रसर हों यह कामना है और हमें अच्छे अच्छे शेर का आनंद उठाने को मिले .

गौतम राजरिशी said...

तीन साल दो सौ पोस्ट....बाप रे! आपकी प्रसन्नता हमें भी विभोर कर दे रही है।

ग़ज़ल बहुत सुंदर बनी है। पहले मक्ते के लिये खड़े होकर तालियां बजा लूं। लाजवाब शेर है ये...लाजवाब। और फिर "दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है" वाला मिस्रा तो उफ़्फ़्फ़्फ़....!!

मोगरे की ये डालियाँ अब तो इस दोहरे शतक के बाद शर्तिया किताब की शक्ल में बनना माँगती हैं।

निर्मला कपिला said...

देर से आने के लिये क्षमा मगर मेरी मिठाई जरूर पडी होगी। ब्लाग की वर्षगाँठ और 200 पोस्ट होने के लिये बधाई। गज़ल तो हमेशा की तरह लाजवाब। शुभकामनायें

MUFLIS said...

फासलों से क्‍यों डरें हम जब तलक
दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है

दिल में उपजे ख़यालात,,
फिर उन्हें अलफ़ाज़ का लिबास ,,
फिर मन-भावन बानगी ,,
और फिर ...एक कामयाब ग़ज़ल.....
क्या किसी को ये बताने की ज़रुरत है कि
ये ग़ज़ल नीरज जी की है...?? नहीं न !!!

ग़ज़ल मतले से लेकर मक्ते तक
पढने वालों तक खुद पहुँच रही है ,,
साथ-साथ चलते हुए,,, बातें करते हुए ही..... वाह
हर शेर अपनी हाज़िरी मनवा रहा है जनाब

MUFLIS said...

itni dher si badhaayiyaan mil rahi hain
to meri jaanib se bhi qbool farmaa lijiye..
aur haaN...
maqte waale sher par
Gautam bhaee ke saath
main bhi kharhaa hoon,,,
taaliyaaN
bajaane
ke liye...

"अर्श" said...

सबसे पहले तो ढेरो बधाई नीरज जी और सलाम ,
मतला आय हाय क्या कमाल का लिखा है आपने ... फिर फासलों से क्यूँ डरें... ज़िंदगी में आप आये इस .... बात नज़रों से ,... कमाल के शे'र कहे हैं नीरज जी आपने ... इस करिश्मा से तो परिचित हूँ ही गुरु जी के आप भी कुछ उनके अलग करिश्मा के लिए तैयार रहें ... :)

अर्श

Mrs. Asha Joglekar said...

200 wi post par abhinandan ! Aap ke rachna ke bareme kuch kehana ho to shabd kum pad jate hain .

फासलों से क्‍यों डरें हम जब तलक
दरमियाँ यादों की पुख्ता डोर है

जिंदगी में आप आये इस तरह
ज्यूँ अमावस बाद आती भोर है
Wah, Wah ,Wah !

शोभना चौरे said...

ब्लागिग के तीन साल और २०० पोस्ट की बहुत बहुत बधाई |
कुछ रिश्ते बनाने से नहीं बनते और अपने आप ही बन जाते है स्नेह और सम्मान के साथ उन्ही में है आपके साथ स्नेह और सम्मान का रिश्ता |
आभार

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

:-)... bahut bahut badhaiyan.. ye karwan chalta rahe...

RAJ SINH said...

दिल से मुबारक हो आपको ये घड़ी . ३ साल ,२०० नायाब पोस्टें .

क्या क्या सौगातें दे गए तुम ' नीरज ' .
अब भी छाये हो .मौसम में भी ,मन में भी .

और न जाने कितनी फुहारों ,बौछारों की उम्मीद लिए ,हमारे जैसे कितने ही , अब भी प्यासे ही हैं .

बस ऐसे ही भिगाते रहो ,मन आनंद से सराबोर करते रहो .

आमीन !!

इमरान अंसारी said...

जज़्बात पर आपकी टिप्पणी और हौसलाफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया |

अनूप शुक्ल said...

मुबारक हो साहब बहुत मुबारक हो!

तिलक राज कपूर said...

अंतराल बाद ब्‍लॉग पर लौटा और एक बेहतरीन ग़ज़ल से साक्षात्‍कार। तीन बधाईयॉं एक साथ।

निपुण पाण्डेय said...

बहुत सुन्दर नीरज जी !
बहुत बहुत शुभकामनाएं २०० पोस्ट एवं ३ साल पूर्ण करने के लिए ! यूँ ही चलता रहे ये सफ़र और साहित्य रस से सराबोर करते रहें आप हमें ! :)

बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है
पूरी गजल ही लाजवाब है पर मकता एक अलग ही गहराई लिए हुए खड़ा है ! बहुत खूब ! :):)

डॉ.त्रिमोहन तरल said...

नीरज जी,
मेरे कम्प्यूटर का पहले तो यू पी एस ख़राब हुआ उसके बाद सी पी यू और दोनों को ठीक कराने में पूरे दस दिन निकल गए । नेट पर बापस आया तो पता चला की आपने अपने ब्लॉग के तीन वर्ष और दो सौ पोस्ट पूरी कर ली। इस बड़ी उपलब्धि पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें। ग़ज़ल तो बेहतरीन है ही :

झूमकर आई घटा घनघोर है
डर रहा हूँ घर मेरा कमज़ोर है

जिस ग़ज़ल का मतला इतना संवेदनशील हो उसके बाकी शेरों पर क्या कहा जाय। सारे शेर उम्दा हैं।

मीनाक्षी said...

तीन साल पूरे होने पर हार्दिक शुभकामनाएँ ... आज ही इस पोस्ट को देख पाए..आपकी हर पोस्ट ऐसी खूबसूरत होती है जैसे प्रकृति की सुन्दर नज़ारे.. ऐसे ही आगे कई सालों तक उसी खूबसूरती का आनन्द लेने की कामना है...

अंकित "सफ़र" said...

नमस्कार नीरज जी,
इस शेर में जो बात कही है, वो सोचने पे मजबूर कर रही है कि शेर ऐसे भी कहा जा सकता है, वाह
चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है

मक्ता बहुत नाज़ुक है, क्या खूब कहा है
बात नज़रों से ही होती है मियां
जो जबां से हो वो 'नीरज' शोर है