Monday, November 2, 2009

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें

दीपावली के पावन पर्व पर इस बार गुरुदेव पंकज सुबीर जी ने धमाकेदार तरही मुशायरे का आयोजन किया. जिसमें देश विदेश के जाने माने माँ सरस्वती के उपासकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. इस मुशायरे में शिरकत करना ही अपने आपमें कम सम्मान की बात नहीं थी. आप सुधि पाठकों के लिए मैं , जो मेरी ग़ज़ल को वहां नहीं पढ़ पाए, यहाँ एक बार फिर प्रस्तुत करता हूँ .




दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें
तम सभी के दिलों से मिटाते रहे

हर अमावस दिवाली लगे आप जब
पास बैठे रहें, मुस्कुराते रहें

प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें

बात सच्ची कही तो लगेगी बुरी
झूठ ये सोच कर क्यूँ सुनाते रहें

दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुत्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें

भूलने की सभी को है आदत यहाँ
कर भलाई उसे मत गिनाते रहें

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

हैं पुराने भी 'नीरज' बहुत कारगर
पर तरीके नये आजमाते रहें

54 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुल्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें

क्या बात है नीरज जी बहुत सुन्दर !

M VERMA said...

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें
वाकई गज़ल तो वही सफल है
बहुत खूब

महफूज़ अली said...

भूलने की सभी को है आदत यहाँ
कर भलाई उसे मत गिनाते रहें

waah! bahut sunder pankti........


ghazal bahut sunder hai...

kshama said...

Yahee aaj kee zaroorat hai...dilon se tam mita den...saare ashar ek se badhke ek hain...aur adhik kya kahun? Aage jo sabhee diggaj kahenge, unhee ke saath shamil hun..!

डॉ टी एस दराल said...

वाह, नीरज भाई, ग़ज़ल का एक एक शेर लाज़वाब है.

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

बहुत खूब. आभार ऐसी ग़ज़ल के लिए.

वन्दना said...

दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुल्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें

bahut hi sundar alfaz.

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

waah.........kisi ki nazaron mein rahne ka bahut hi badhiya zariya.

vaise poori gazal hi tarif ke kabil hai.

अर्कजेश said...

हर अमावस दिवाली लगे आप जब
पास बैठे रहें, मुस्कुराते रहें ।

बहुत खूब कहा है ।

महेन्द्र मिश्र said...

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

शेर लाज़वाब है.

Apanatva said...

jitanee tareef kee jae kam hee rahegee . Bahut pyaree rachana . badhai

pukhraaj said...

बहुत खूबसूरत बात कही
हर अमावास दिवाली लगे, आप जब
पास बैठे रहें , मुस्कुराते रहें ...

किसी के मुस्कुराने से तो वैसे ही दिए जल उठते हैं ...हर अमवाव्स को दिवाली बना दे जो उस मुस्कराहट की तो बात ही क्या है

सुशील कुमार छौक्कर said...

गजल के शेरों के ये दीपक बहुत सुन्दर लगे।
दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुल्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें

वाह नीरज जी।

"अर्श" said...

उस्ताद शईरों की गज़लें जीतनी बार पढ़ी जाये मन नहीं भरता... क्या करूँ बरबस जब सुबह ब्लॉग पे आया तो आपकी ग़ज़ल हाथ लगी और दिल वाह वाह कह उठा... हर शे'र उस्तादाना ... गिरह कैसे लगाते है यही पढ़ के होश गम है,... दूसरा शे'र और तीसरे में क्या खूब नजाकत देखने को मिल रहा है ... प्यार बासी हमारा न ... इस शे'र से अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहा हूँ , आपके ब्लॉग पे फिर से इस जगमगाती दिवाली वाली ग़ज़ल को पढ़ सुखद अनुभूति एक एहसास हो रहा है ... बहुत बहुत बधाई
लुत्फ़ की टाइपिंग मिस्टेक है शायद...
सलाम,

आपका
अर्श

रश्मि प्रभा... said...

हर अमावस दिवाली लगे आप जब
पास बैठे रहें, मुस्कुराते रहें
किसी की मुस्कान में दिए झिलमिला जाएँ ,
इससे अधिक रौशन ख्याल क्या होगा !

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

बहुत सुन्दर लिखते हैं आप ...बेहद पसंद आई यह ..शुक्रिया

ओम आर्य said...

नीरज जी
गज़ल की की एक एक शेर खुब्सूरत है जिन्हे पढकर गुनगुनाने को दिल कर रहा है ...............बेहद खुबसूरत रचना!

सादर

ओम

नवीन त्यागी said...

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें
तम सभी के दिलों से मिटाते रहे


हर अमावस दिवाली लगे आप जब
पास बैठे रहें, मुस्कुराते रहें
bahut sundar rachana hai.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

पंकज सुबीर said...

प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें
इस शेर को पढ़ कर एक गीत याद आता है और बहुत ही शिद्दत से याद आता है ए मेरी जोहरा जबीं तुझे मालूम नहीं । आपका ये ग़ज़ल रूपी बम एन दीपावली के दिन ही फूटा था और उसकी धमक देर तक मेहसूस की जाती रही थी । फिर भी मैं तो एक ही शेर के आनंद में डूबा हूं कि हम बुलाते रहें वो लजाते रहें । अहा अहा अहा । हालंकि इस शेर का मजा लेने की उम्र अभी नहीं आई है लंकिन अगर ये मजा दे रहा है तो इसका मतलब ये है कि शेर में दम है । सुंदर रचना सुंदर शेर सुंदर शायर सबको बधाई ।

P.N. Subramanian said...

"प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें"
बहुत सुन्दर रचना.प्यारे से सभी. आभार

Nirmla Kapila said...

दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुत्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें
सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें
आपकी ओt पूरी गज़ल सफल है गुनगुना रहे हैं बहुत सुब्दर बधाई । धन्यवाद्

विनोद कुमार पांडेय said...

हर एक शेर लाज़वाब..बधाई नीरज जी

बस दुआ है यही की ग़ज़ल आपकी
हम सभी को हमेशा लुभाती रहे,

Priya said...

Lagta hai ki aap dushyant kumaar ke fan hai.....aapka style kafi similar hain ..Nice gazal

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

----------
सच्ची बात नीरज जी।

राज भाटिय़ा said...

भूलने की सभी को है आदत यहाँ
कर भलाई उसे मत गिनाते रहें
आप की गजल सच मै बहुत सुंदर लगी धन्यवाद

Prem said...

vबहुत खूब ,प्रशंसनीय अभिव्यक्ति ।

AlbelaKhatri.com said...

सभी शे'र उम्दा...........
हर बात उम्दा....
मुकम्मल ग़ज़ल उम्दा ........

बधाई !
बधाई !
बधाई !

लता 'हया' said...

neeraj bhaisaheb;
aap aur purane? OLD IS GOLD.

main yahi soch rahi thi ki mujhe tarhi m. mein bhej kar aap kahan gayab ho gaye? oh to aap pahele hi apna kaam karke nikal chuke hain!
to main subir ji ke blog se sidhi yahan aayi aur aakhir pakad hi liya na?
wah,bahut khoob,behatreen,umda etc.etc.etc.

Udan Tashtari said...

प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें


--वहाँ भी पढ़े थे और यहाँ भी. उतना ही ताजा रहा हर बार...गजब लिखा है एक एक शेर!! बधाई लिजिये न!!

Mrs. Asha Joglekar said...

क्या बात है नीरज जी हर बार आपको पढ कर एक अलग मजा आता है । सभी शेर अच्छे हैं पर हमारी उम्र में ये शेर मुझे बहुत अच्छा लगा
प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें पर कुछ यूं
प्यार बासी हमारा न होगा अगर
वो बुलाते रहें हम लजाते रहें ।

Dipak 'Mashal' said...

Neeraj sir ye gazal main pahli baar bhi Subeer samvad sewa pe padh chuka hoon, lekin itni pyari lagi ki jitni bar padha jaye kam hi hai.. ek ek sher dimag pe chha jane wala hai..
fir se aapko bahut dhanyawad ise punah padhwane ke liye...

Jai Hind

रविकांत पाण्डेय said...

आदरणीय नीरज जी, इस गज़ल ने तो पहले ही लूट लिया था गुरूदेव के ब्लाग पर, रही-सही कसर आज आपने पूरी कर दी। सभी शेर जुबान पर चढ़ चुके हैं...किन शब्दों में तारीफ़ करूं?

Sudhir (सुधीर) said...

अच्छी रचना, हर शेर सुन्दर बन पड़े हैं...सबसे प्यारा शेर लगा -

प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें

वाह!!

Babli said...

बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल है और सारे शेर एक से बढ़कर एक हैं! बेहद पसंद आया आपका ये शानदार ग़ज़ल! लिखते रहिये!

Devendra said...

वाह! सभी शेर एक से बढ़कर एक हैं

नीरज गोस्वामी said...

E-Mail received from Om Prakash Sapra Ji:-

shri neeraj ji
namastey,

really a good gazal, although festival of lights "dewali" is over, but you and your poetry is still being remembered with us.
therefore your gazal is most welcome, especially the following lines are most impressive :-

दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुत्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें


भूलने की सभी को है आदत यहाँ
कर भलाई उसे मत गिनाते रहें


सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

congratulations for for a good gazal.
regards,
-om sapra, delhi-9
9818180932

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Neeraj bhai,
This GAZAL is really romantic :) &
sensitive .a rare combination indeed
warm rgds,- Lavanya

डॉ .अनुराग said...

आप जैसे लोग तो जहां बैठ जाते है ...शमाये खुद ही जल जाती है ..
एक शेर है कभी किसी मौके पर लिखा था .
"जाने कैसा अजीब शख्स था वो ......
जाते जाते भीड़ में तन्हाईया दे गया "

rashmi ravija said...

बहुत ही ख़ूबसूरत रचना है है....शेर हैं या एक से बढ़कर एक नायाब नगीने जड़े हैं,..इस ग़ज़ल में..

दिगम्बर नासवा said...

JITNI बार PADHO UTNI बार अच्छी LAGTI है आपकी GAZAL NEERAJ जी ......... सब SHER एक से BADH कर एक हैं .......

RAJ SINH said...

नीरज भाई ,

क्या खूब !
आपकी शान में मेरी एक तुकबंदी .

दर्द नीरज कभी तुमको घेरे नहीं
गुदगुदाते रहें खिल्खिलातें रहें .
आमीन .

Ratan said...

"हैं पुराने भी 'नीरज' बहुत कारगर
पर तरीके नये आजमाते रहें"..........

Wah ji wah.. dil khush ho gaya..

I am sure mera aaj kaa din bilkul diyon ki roshni ki tarah jagmagate rahega.

Oye hoye.. :-)

गिरीश पंकज said...

neeraj ji, aapne meri kavitaon ko saraaha. sarahane vale ko mai bhi dekhu, so aapke blog yani ki baag tak pahuncha to dil baag-baag ho gaya. aapki bhavnaye sundar hai. doosaro ki pastako ka parichay dete hai, yah badi baat hai. aur aapki ghzale...? apke man ki tarah hi achchhi lagi.

लोकेन्द्र said...

वाह-वाह.....
एकदम नया......

ज्योति सिंह said...

laazwaab rachna
दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुत्फ़ है, दर्द में खिलखिलाते रहें


भूलने की सभी को है आदत यहाँ
कर भलाई उसे मत गिनाते रहें


सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें
bahut khoob .

Apoorv said...

प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें

हमारे पतले गले की वाह-वाह तो यहाँ कद्रदानों की भीड़ मे सुनायी नही देगी..मगर मुशायरे का क्या रंग रहा होगा..समझ आता है आपकी गज़ल पढ़ कर..बेहतरीन
.सफ़ल हुई आपकी गज़ल..हम गुनगुना रहे हैं..

BrijmohanShrivastava said...

नीरज जिसे बुलायें वो क्यों न मुसकराये
और उसकी काली रातें फिर क्यों न जगमगाये
(अब मेरी औकात)
दर्द से क्यों बिलबिलाओ
आयोडेक्स लगाओ
सेरीडोन खाओ

SAHITYIKA said...

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें

bahut hi badhiya panktiya hai..

Dr. kavita 'kiran' (poetess) said...

neeraj ji meri gazal ko sarahne ka shukriya.gazal hui ya nahi ye koi parkhee hi bata sakta hai naa!
सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें
yahi gazal ki kamyabi hai.sher pasand aaya.badhai.
aapke ak aur sher se mujhe apni ak bahut purani gazal ke sher yad aa gaye, sune-
ख्वाब आते रहे खवाब जाते रहे
नींद ही में अधर मुस्कुराते रहे
वक़्त की बर्फ यूँ ही पिघलती रही
वो बुलाते रहे हम लजाते रहे...kavitakiran

sada said...

सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें
हर पंक्ति अपने आप में बेहतरीन यह पंक्तियां ही सुन्‍दर एवं परिपूर्णता लिये हुये, बधाई के साथ आभार ।

Kusum Thakur said...

"सच कहूँ तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें गुनगुनाते रहें "

सच मैं तो गुन गुनाने लगी । बधाई !!

गौतम राजरिशी said...

घर पे हूँ तो नेट और ब्लौग को कम समय दे पा रहा हूँ नीरज जी...इस तरही के तो हम उसी दिन से मुरीद रहे हैं।
"सच कहूं तो सफल वो ग़ज़ल है..." ---सचमुच और इस पैमाने पर तो आपकी हर ग़ज़ल लाजवाब होती है।

Rajey Sha said...

उपस्‍थि‍त।

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत खूब!!

Shiv Kumar Mishra said...

सुन्दर गजल. अब तो शब्द नहीं मिलते तारीफ करने के लिए.