Tuesday, January 1, 2008

झूट जब बोला तो ताली हो गई


बात सचमुच में निराली हो गई
झूट जब बोला तो ताली हो गई

फेर ली जाती झुका कर थी कभी
उस शरम से आँख खाली हो गई

ये असर हम पे हुआ इस दौर का
भावना दिल की मवाली हो गई

मिल गई उनको इजाज़त जुल्म की
अपनी तो फ़रियाद गाली हो गई

इक नदी बहती कभी थी जो यहाँ
बस गया इंसा तो नाली हो गई

डाल दीं भूखे को जिसमें रोटियां
वो समझ पूजा की थाली हो गई

हाथ में कातिल के नीरज फूल है
बात अब घबराने वाली हो गई