
बात सचमुच में निराली हो गई
झूट जब बोला तो ताली हो गई
फेर ली जाती झुका कर थी कभी
उस शरम से आँख खाली हो गई
ये असर हम पे हुआ इस दौर का
भावना दिल की मवाली हो गई
मिल गई उनको इजाज़त जुल्म की
अपनी तो फ़रियाद गाली हो गई
इक नदी बहती कभी थी जो यहाँ
बस गया इंसा तो नाली हो गई
डाल दीं भूखे को जिसमें रोटियां
वो समझ पूजा की थाली हो गई
हाथ में कातिल के नीरज फूल है
बात अब घबराने वाली हो गई
झूट जब बोला तो ताली हो गई
फेर ली जाती झुका कर थी कभी
उस शरम से आँख खाली हो गई
ये असर हम पे हुआ इस दौर का
भावना दिल की मवाली हो गई
मिल गई उनको इजाज़त जुल्म की
अपनी तो फ़रियाद गाली हो गई
इक नदी बहती कभी थी जो यहाँ
बस गया इंसा तो नाली हो गई
डाल दीं भूखे को जिसमें रोटियां
वो समझ पूजा की थाली हो गई
हाथ में कातिल के नीरज फूल है
बात अब घबराने वाली हो गई
