Monday, December 28, 2009

जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

सुधि पाठको प्रस्तुत है इस वर्ष की अंतिम ग़ज़ल "नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाओं सहित"



उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें
कुछ वो चुनती हमें,कुछ को हम खुद चुनें

जो नचाती हमें थीं भुला सारे ग़म
याद करते ही तुझको बजी वो धुनें

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

वक्त ने जो उधेड़े हसीं ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

सिर्फ पढने से होगा क्या हासिल भला
ज़िन्दगी में न जब तक पढ़े को गुनें

जो भी सच है कहो वो बिना खौफ के
तन रहीं है निगाहें तो बेशक तनें

अब रिआया समझदार 'नीरज' हुई
हुक्मरां बंद वादों के कर झुनझुनें

(गुरुदेव पंकज सुबीर जी द्वारा दुलारी गयी ग़ज़ल)

54 comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें
.... bahut sundar !!!!

Shiv Kumar Mishra said...

हमेशा की तरह एक और सुन्दर ग़ज़ल.

योगेन्द्र मौदगिल said...

wah bhai g subah subah aapki shaandaar GAZAL pad kar man MOGAMBO ho gaya ........

saadhuwad.....

रश्मि प्रभा... said...

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें
.........
ना पूछिये हमसे हमारी ख़ुशी
जिसको पढ़ने को ऐसी ग़ज़लें मिले

दिगम्बर नासवा said...

वक्त ने जो उधेड़े हंसी ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

वर्ष का अंत बहुत ही धमाकेदार ग़ज़ल से किया है नीरज जी आपने ..........
नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकांनाएँ ...........

गिरीश पंकज said...

har sher bade pyare hai....badhai.

महेन्द्र मिश्र said...

नीरज जी
गजल के भाव बेहद अच्छे लगे ..नववर्ष की शुभकामना के साथ ...आभार

सागर said...

जाते जाते वो मुझे सच्ची/अच्छी निशानी दे गया...

अनिल कान्त : said...

आनंद आ गया.

पंकज सुबीर said...

मतले का मिसरा उला ही अपने आप में ग़ज़ल की पूरी कहानी कह रहा है । और फिर मिसरा सानी भी उसका पूरक हो रहा है । पूरी ग़ज़ल पर भारी है मतला । अहा आनंद का मतला है ।

राज भाटिय़ा said...

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें
बहुत सुंदर रचना

"अर्श" said...

नीरज जी नमस्कार,
अहा क्या मतला है मजा आगया मैं तो वहाँ से निचे उतर ही नहीं रहा क्या करूँ, सच में पूरी ग़ज़ल पर मतला भारी है, शब्द नहीं मिल रहे हैं उसके बारे में कुछ कहने केलिए और फिर निचे का हर शे'र अपने आप में मुकम्मल बातें कर रही हैं, शाख वाला शे'र तश्वीर के मेल खा रहा है पहले तो ब्लॉग पर यह तस्वीर देख कर ही चौक गया था मगर वो शे'र पढ़ दि्ली सुकून बेकरारी में बदल गयी , , बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल , नव वर्ष की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएं..

अर्श

सुलभ सतरंगी said...

सुन्दर रचना है. कुछ शे'रो में आपने जिस प्रकार अपने अन्दर के दर्द को बयान किया है. वो लाजवाब है.

M VERMA said...

जो भी सच है कहो वो बिना खौफ के
तन रहीं है निगाहें तो बेशक तनें
बहुत खूबसूरत है साल का यह आखिरी तोहफा.

निर्मला कपिला said...

वक्त ने जो उधेड़े हंसी ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

सिर्फ पढने से होगा क्या हासिल भला
ज़िन्दगी में न जब तक पढ़े को गुनें
वाह बहुत खूब । बाकी सब तो सुबीर जी ने कह दिया। फोर आपकी गज़ल और सुबीर जी की तारीफ के बाद भी कुछ कहूँ तो इतनी हिम्मत नहीं है। लाजवाब नये साल की आपको बहुत बहुत शुभकामनायें

पी.सी.गोदियाल said...

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें
Ati Sundar !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

पोस्ट इतनी अच्छी लगी कि
इसे चर्चा मंच मे लेना पड़ा!

रविकांत पाण्डेय said...

आदरणीय नीरज जी,
डाल दिया न फ़िर आपने मुश्किल में! अब तारीफ़ के लिये शब्द कहां से ढूंढूं?? इतना जानलेवा मतला!!! और फ़िर कयामत ढाते शेर!!!सुभान अल्लाह! आपके ब्लाग पर हमेंशा कुछ सीखने को मिलता है।

Dr. Chandra Kumar Jain said...

बहुत खूब साहब.
हर शेर पढ़कर गुनता भी रहा
....और गुन रहा हूँ.
=========================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

विनोद कुमार पांडेय said...

behatreen gazal..sachi baton aur sundar bhav se saji gazal..bahut badhiya laga..badhai neeraj ji

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

नीरज जी, आदाब
ग़ज़ल का मतला वाकई तमाम शेरों पर भारी है
और ये शेर-
जो भी सच है कहो वो बिना खौफ के
तन रहीं है निगाहें तो बेशक तनें

जाने कितनों को प्रेरणा देने वाला है

जब खुलें लब तो अलफ़ाज़ सच हों सभी
जब बढ़ें यें क़दम राह हक़ की चुनें
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

अर्कजेश said...

वाह क्‍या बात है ! बेहतरीन !

उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें
कुछ वो चुनती हमें,कुछ को हम खुद चुनें

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

आप ने एक ऐसी ही बात इस ग़ज़ल के जरिए
आज सुना दी नीरज भाई
जिसे ये दुनिया भी अगर माने तब क्या बात है ,
सब बढ़िया हो जाए
नव - वर्ष की अनेक शुबकामनाएं
स्नेह,
- लावण्या

नीरज गोस्वामी said...

E-mail received from sh.Om Sapra Ji:-

Shri neeraj ji
good gazal
this may be last gazal of the year, but it is new beginning of the year ahead, awaiting for thousands of aspiratons and dreams for us. these lines are more imprssive:-
पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

वक्त ने जो उधेड़े हंसी ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

सिर्फ पढने से होगा क्या हासिल भला
ज़िन्दगी में न जब तक पढ़े को गुनें

HAPPY NEW YEAR - SHRI NEERAJ AND FAMILY

with regards,
-om sapra, delhi-9

Manish Kumar said...

Saal ke jate jate itni saralta se aapne in seekhon ko samet diya apni ghazal mein.
Humesha ki tarah ek behtareen prayas. Naye saal mein bhi ghazlon aur kitabon se roobaru karane ka aapka silsila chalta rahe isi ummed ke sath.

डॉ .अनुराग said...

वक्त ने जो उधेड़े हंसी ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

फिर जी में है कि दर पे किसी के पड़े रहें
सर ज़ेर बार-ए-मिन्नत-ए-दर्बाँ किये हुए

जी ढूँढता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए

"ग़ालिब" हमें न छेड़ कि फिर जोश-ए-अश्क से
बैठे हैं हम तहय्या-ए-तूफ़ाँ किये हुए -Galib

Prashuram Rai said...

इतनी अच्छी ग़ज़ल पेश करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

वन्दना said...

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

वक्त ने जो उधेड़े हंसी ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

behad khoobsoorat ahsason se labrej........shukriya .

navvarsh ki hardik shubhkamnayein.

अल्पना वर्मा said...

'पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें '

बेहद उम्दा शेर!
''''रोशनी की अहमियत भी वही जाने जिसने देखे हों आँधियारे!'''

बेहतरीन ग़ज़ल!
नूतन वर्ष की आप को भी अग्रिम शुभकामनाएँ.

haidabadi said...

जनाबे नीरज साहिब
खुबसूरत ग़ज़ल खुश बियानी से भरपूर
हिन्दवी अंदाज़ में आपकी इस ग़ज़ल पे
आबूर का टीका लगा लगता है
मेरा सारा दीवान आपकी इस ग़ज़ल पर कुर्बान
क़िबला अल्फाज़ नहीं मिल रहें हैं क्या कहूँ
आपकी ग़ज़ल में नफासत है हकीकत है
अल्फाजों को ऐसे तराशा है आपने के ग़ज़ल ख़ुब से ख़ूबसूरत
बन पाई है आपकी कलम ने जो हुस्न ग़ज़ल को दिया है
संग तराश भी देखे तो शर्मिन्दा हो जाये
इस साल की आखिरी ग़ज़ल ने अपने नकूश छोड़ दिए हैं
आदाब
चाँद शुक्ला हदियाबादी

MUFLIS said...

नीरज भाई ....
एक बार फिर
आपकी उम्दा ग़ज़ल से मुलाक़ात
एक बार फिर
मेरी ज़ियारत हो गयी ...

जनाब हदियाबादी जी के तब्सिरे से
इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ ....
इल्हाम की शाईरी इसी को कहते हैं
माना !
कि मतला ग़ज़ल की जान बन पडा है
लेकिन ये शेर.......
"पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें "
जनाब ये शेर तो
जाने कितनी ही उलझनों की
पीड़ा को हर ले गया जान पड़ता है

आपकी ग़ज़लों को पढ़ना
एक तरह से इबादत ही तो है
सलाम कुबूल फरमाएं हुज़ूर !!

तिलक राज कपूर said...

ले खुद के ही नाम, तुझको अल्लाह रक्खे

सोचते हैं कभी ख्‍वाब में आ मिलो

सामने तुमको बैठा के ग़ज़लें सुनें।

रातभर बैठकर, सोचते हम रहे
जिन्‍दगी फिर से कैसे उधेड़ें बुनें।

तिलक राज कपूर

गौतम राजरिशी said...

साल के जाते-जाते क्या ग़ज़ल सुनायी है, नीरज जी। वाह! ये है एकदम नीरज जी की ठप्पा लगी हुई ग़ज़ल....

मक्ते ने तो लूट ही लिया, कसम से!

Udan Tashtari said...

गुरुदेव दुलार चुके हैं..सब सराह चुके हैं...हम...हम निहार चुके हैं. :)

भाई, बहुत खूब कहते हो आप!! शानदार.


--


मुझसे किसी ने पूछा
तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
तुम्हें क्या मिलता है..
मैंने हंस कर कहा:
देना लेना तो व्यापार है..
जो देकर कुछ न मांगे
वो ही तो प्यार हैं.


नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

शोभना चौरे said...

सिर्फ पढने से होगा क्या हासिल भला
ज़िन्दगी में न जब तक पढ़े को गुनें
bahut khoob aur durust likha hai aapne .

बवाल said...

उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें
कुछ वो चुनती हमें,कुछ को हम खुद चुनें
अहा अहा ! क्या कहना है !
आदरणीय नीरज जी,
आपने हमारी वेडिंग एनिवर्सरी २८ दिसम्बर पर एक बेइंतेहाँ ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही। हम आप पर अपने हक़ से इसे बतौर तोहफ़ा माँग रहे हैं। हमें इस ग़ज़ल को कभी कभार साहित्यिक महफ़िलों (प्रोफ़ेशनल नहीं) में गाने की इजाज़त ज़रूर दीजिएगा। हम अपने बड़े भाई की इस ग़ज़ल को पेश करने में फ़ख़्र महसूस करेंगें। गुरूदेव पंकज जी को हमारा प्रणाम। आपको नव वर्ष पर शुभकामनाएँ।

अमिताभ मीत said...

क्या बात है नीरज जी, उम्दा शेर, बढ़िया ग़ज़ल !

नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं.

मीत

Mrs. Asha Joglekar said...

जो भी सच है कहो वो बिना खौफ के
तन रहीं है निगाहें तो बेशक तनें ।
क्या कमाल की गज़ल लिखते हैं आपके ब्लॉग पर आना हमेशा की तरह वसूल ।

डॉ. मनोज मिश्र said...

वर्ष नव-हर्ष नव-उत्कर्ष नव
-नव वर्ष, २०१० के लिए अभिमंत्रित शुभकामनाओं सहित ,
डॉ मनोज मिश्र

manu said...

नीरज जी...
नया साल आपके लिए खुशियाँ ही खुशियाँ लाये....
लाजवाब मतले की तारीफ़ तो करूंगा ही...

उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें...
हों नए साल पर ख़त्म ये उलझनें...

सीमा रानी said...

घर बैठे पुस्तक पढवाते नीरज जी .
दुनिया भर की सैर करते नीरज जी
फोटो हो या रंग -रंगोली ,
या हो पिकनिक का आनंद .
ब्लॉग पे इनके आ भर जाओ ,
सब दिखलाते नीरज जी .

आपके ब्लॉग पर आकर सचमुच बहुत ही अच्छा लगता है .इतने बढ़िया फोटोग्राफ्स दिखने के लिए आभार .
आपको और आपके परिवार जनों को नववर्ष मंगलमय हो .

RAJ SINH said...

अब रियाया समझदार ' नीरज ' हुयी ......................
क्या बात है नीरज भाई !

भाभी , मिष्ठी सहित सपरिवार स्वजनों को नव वर्ष का हार्दिक अभिनन्दन !

महेन्द्र मिश्र said...

नववर्ष की आप सभी को हार्दिक शुभकामना - महेन्द्र मिश्र

लता 'हया' said...

happy new year pinnu bhaiya .itni behtareen gazal kahi hai ki har sher par daad dene ko je chahta hai lihaza pehle sher ke liye:-
1) wah
2)umda
3)lajawab
4)benazeer
5)kya kehne
6)kya baat hai
7)muqarrar, muqarrar

सुशील कुमार छौक्कर said...

साल के जाते जाते हमने आपकी पोस्ट एक और फोटो मार ली। कितना गलत काम किया। और आपने साल के जाते जाते कितना अच्छा काम किया कि इतनी बेहतरीन, लाजवाब गजल पढवाई है।
वक्त ने जो उधेड़े हसीं ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

वाह क्या बात है दिल चीर दिया जी।

हरकीरत ' हीर' said...

साल के जाते जाते नीरज जी ग़ज़ल के साथ साथ ...एक लड़की की खुबसूरत तस्वीरें भी पहली बार देखी गीत भी सुना .... ..तस्वीरें देखते देखते सोच रही थी ये नीरज जी कितने जिंदादिल इंसान हैं .....!!

अनूप शुक्ल said...

नया साल मुबारक हो। आपकी गजलें बड़ी चोर टाइप होती हैं। हमारा दिल चुरा के ले जाती हैं। कौन थाने में रपट लिखायें -बतायें।

MUFLIS said...

nav varsh
ki
dheroN
shubh kaamnaaeiN

Devi Nangrani said...

Naye saal ki dher sari shubhkamnaon ke saath sachayi saamne aayi hai

"Yeh to aagaaz hai Nav Varsha
Ant kisne dekha ant ka"

Roshani said...

नीरज जी नव वर्ष में आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनायें....

Prem said...

भावपूर्ण रचना बहुत अच्छी लगी बधाई ,नव वर्ष आप के लिए मंगलमय हो .आप जीवन में खूब सफलता पायें .परिवार में सबको हमारी शुभकामनायें ।

श्रद्धा जैन said...

पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें
waah Neeraj ji kamaal ka sher

जो भी सच है कहो वो बिना खौफ के
तन रहीं है निगाहें तो बेशक तनें

bahut hi khoobsurat gazal

aapko nav varsh ki hardik shubhkamana

निपुण पाण्डेय said...

नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं नीरज जी और साथ में इस बेहद खूबसूरत तोहफे के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !

उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें
कुछ वो चुनती हमें,कुछ को हम खुद चुनें

जीवन का सार तो आपने इस मतले में ही समझा दिया ! और बाकी शेर उसमें चार और चाँद लगाने जैसा हो गया है...:):)


वक्त ने जो उधेड़े हसीं ख्वाब वो
आओ मिल कर दुबारा से फिर हम बुनें

सिर्फ पढने से होगा क्या हासिल भला
ज़िन्दगी में न जब तक पढ़े को गुनें

kaviraj said...

कुछ हस्ती है कि मिटती नहीं
आपसे यु मुलाकात हो जाएगी
ये बात दुनियाको जचती नहीं
फ़िलहाल तो आपका कलेक्सन
अच्छा है पर आपसे मुलाकात
यु सस्ती नही