Monday, April 4, 2022
किताबों की दुनिया - 254
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शबे ग़म की सहर नहीं होती हो भी तो मेरे घर नहीं होती हल्क़ से घूंट भर जहां उतरी तौबा फिर उम्र भर नहीं होती वस्ल में ये बला भी होती है रा...
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