Monday, November 18, 2013

आप भी तो अब पुराने हो गये




दूर होंठों से तराने हो गये 
हम भी आखिर को सयाने हो गये 

यूं ही रस्ते में नज़र उनसे मिली 
और हम यूं ही दिवाने हो गये 

दिल हमारा हो गया उनका पता 
हम भले ही बेठिकाने हो गये 

खा गई हमको भी दीमक उम्र की 
आप भी तो अब पुराने हो गये 

फिर से भड़की आग मज़हब की कहीं 
फिर हवाले आशियाने हो गये 

खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब 
बेसबब मौसम सुहाने हो गये 

आइये मिलकर चरागां फिर करें 
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये 

लौटकर वो आ गये हैं शहर में 
आशिकों के दिन सुहाने हो गये 

देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये 
बात इतनी थी, फसाने हो गये

30 comments:

  1. बढ़िया-
    सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    ReplyDelete
  2. खा गई हमको भी दीमक उम्र की
    आप भी तो अब पुराने हो गये

    खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
    बेसबब मौसम सुहाने हो गये

    आइये मिलकर चरागां फिर करें
    आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये

    देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये
    बात इतनी थी, फसाने हो गये

    बढ़िया !!

    ReplyDelete
  3. खा गई हमको भी दीमक उम्र की
    आप भी तो अब पुराने हो गये
    वाह ... बहुत खूब कहा आपने इन पंक्तियों में
    सादर

    ReplyDelete
  4. जब दिल इतने जवाँ हों तो पुराने कैसे हो सकते हैं आप ... और सयाने तो कभी भी नहीं ...

    ReplyDelete
  5. सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  6. वाह वाह बेहद उम्दा शानदार जानदार ग़ज़ल ढेरों दिली दाद कुबूल फरमाएं.

    ReplyDelete
  7. मैं दिगंबर जी की बातों से सहमत हूँ।
    बहुत बढ़िया ग़ज़ल है बड़े भाई।
    जीते रहिए।

    ReplyDelete
  8. बहुत खूब! बहुत ही सुन्दर!


    खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
    बेसबब मौसम सुहाने हो गये

    देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये
    बात इतनी थी, फसाने हो गये

    आते है मेरे शहर में वो मगर
    और भी उनके ठिकाने हो गये

    ReplyDelete
  9. dekh kar neeraj ko vo muskaa diye
    baat itnee thee , fasaane ho gaye

    kyaa baat hai !

    chitra bhee kamaal kaa hai
    chasm-e-baddoor

    ReplyDelete
  10. खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
    बेसबब मौसम सुहाने हो गये

    आइये मिलकर चरागां फिर करें
    आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये

    वाह नीरज सर बहुत बढ़िया ग़ज़ल

    ReplyDelete
  11. देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये
    बात इतनी थी, फसाने हो गये
    ये इतनी सी बात है;क्‍या बात करते हैं जनाब।

    ReplyDelete
  12. वाह सर सबसे ऊपर आपकी और मैम की
    फोटो देखकर दिल खुश हो गया।
    ये खूबसूरत गजल लगता है आपने बतौर
    शादी की सालगिरह का तौहफा
    मैम के लिए लिखी है बढिया तौहफा है जी
    मगर पुराने होने वाली बात पर आपके और
    मैम के लिए आपका ही एक शेर नजर है.....
    प्यार हमारा ना होगा अगर
    हम बुलाते रहे वो लजाते रहे ��

    ReplyDelete
  13. शेर कृपया ऐसे पढे..

    प्यार बासी हमारा ना होगा अगर
    हम बुलाते रहे वो लजाते रहे ��

    ReplyDelete
  14. वाह वाह बहुत खूब

    ReplyDelete
  15. आइये मिलकर चरागां फिर करें
    आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये
    बहुत खूब !

    ReplyDelete
  16. वक्त का तकाजा है ..समय के साथ एक जैसा कुछ भी रह जाता है!
    बहुत सुन्दर रचना ..

    ReplyDelete
  17. लाजवाब ग़ज़ल के लिए बधाईयाँ................

    ReplyDelete
  18. कल 20/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  19. दिल हमारा हो गया उनका पता
    हम भले ही बेठिकाने हो गये
    आइये मिलकर चरागां फिर करें
    आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये

    लौटकर वो आ गये हैं शहर में
    आशिकों के दिन सुहाने हो गये सुन्दर अभिव्यक्ति.
    कहना चाहूंगा,करें क्या उनका जो हमारी जरा सी बात पर बेगाने हो गए.

    ReplyDelete
  20. तिरछी टोपी वाले और उनके साथी कभी पुराने नहीं होते सर :-)
    फिर शायरों की तो बात ही और है..
    बेहतरीन ग़ज़ल..

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  21. Jab se aapne hame bhula diya tab se kaafi dinon baad aapko padh raha hoon..
    Wahi nasha hai.. Makta kamaal!!

    ReplyDelete
  22. आइये मिलकर चरागां फिर करें
    आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये...

    लाजवाब...

    ReplyDelete
  23. वाह॥वाह...वाह वाह ...वाह वाह

    ReplyDelete
  24. बहट ही उम्दा ग़ज़ल हुई है ..

    ReplyDelete
  25. 'Cowboy' आप तो बेग़म 'Sherif'
    शहर में अब जाने-माने हो गये .
    http://mansooralihashmi.blogspot.in

    ReplyDelete
  26. आइये मिलकर चरागां फिर करें
    आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये
    बहुत बेहतरीन ....

    ReplyDelete
  27. Charanbandna Sir Ji

    खा गई हमको भी दीमक उम्र की
    आप भी तो अब पुराने हो गये


    खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
    बेसबब मौसम सुहाने हो गये


    लौटकर वो आ गये हैं शहर में
    आशिकों के दिन सुहाने हो गये

    bahut hi sunder kya baat hein..

    ReplyDelete

तुझको रक्खे राम तुझको अल्लाह रक्खे
दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रक्खे