Monday, March 28, 2011

क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

देखिये जिसको, वही मगरूर है
मौत को, शायद समझता दूर है

मुस्कुराकर देखते हैं, फिर नया
हो गया ग़र ख्वाब, चकनाचूर है

आलमे तन्हाई का दोज़ख है क्या
पूछ उस से, जो बहुत मशहूर है

जो उसूलों पर टिका, उसके लिए
बस यही समझे सभी, मजबूर है

धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
हम जिसे कहते थे, इनका नूर है

गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर
दर्द वो होता नहीं काफूर है

49 comments:

  1. गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    बहुत ख़ूब !
    ख़ूबसूरत मतला !
    छोटी बहर की ख़ूबसूरत और मुकम्मल ग़ज़ल

    ReplyDelete
  2. छोटे बहर की अच्छी गज़ल।

    ReplyDelete
  3. जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर

    दर्द वो होता नहीं काफूर है

    jai baba banaras........

    ReplyDelete
  4. देखिये जिसको, वही मगरूर है
    मौत को, शायद समझता दूर है
    और ये
    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है
    बहुत खूबसूरत शेर

    ReplyDelete
  5. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है
    waah kamaal hai

    ReplyDelete
  6. मुस्कुराकर देखते हैं, फिर नया
    हो गया ग़र ख्वाब, चकनाचूर है

    vaah!

    ReplyDelete
  7. Neeraj jee aakhiri dono sher lajawab ban pade hai.Vaise to puri ghazal hi achhi hai.

    ReplyDelete
  8. आलमे तन्हाई का दोज़ख है क्या...

    बढ़िया

    ReplyDelete
  9. नीरज जी,

    सुभानाल्लाह........ये बंद इस पोस्ट के लिए आपको सलाम करता है.....हर शेर उम्दा....एक से बढकर एक......सबमे गहराई है ......वाह.....वाह.....

    ReplyDelete
  10. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है

    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    बहुत खूब ...खूबसूरत गज़ल

    ReplyDelete
  11. जो उसूलों पर टिका, उसके लिए
    बस यही समझे सभी, मजबूर है

    वाह,नीरज जी! हर शेर यथार्थ के भावों से तराशे हैं आपने !

    शुक्रिया !

    ReplyDelete
  12. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है

    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    वाह ....बहुत खूब ।

    ReplyDelete
  13. वाह रे वाह, क्या खूब है?

    ReplyDelete
  14. बहुत खूब!
    हमेशा की तरह बहुत खूब!

    ReplyDelete
  15. बेहद खूबसूरत गज़ल ,आभार ..

    ReplyDelete
  16. जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर
    दर्द वो होता नहीं काफूर है


    नीरज जी, बस एक शब्द........... लाजवाब.
    निशब्द कर दिया.

    ReplyDelete
  17. गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है।
    अब हुजूर अश्‍क तो अश्‍क है इसकी सल्‍तनत में कोई भेदभाव नहीं होता।
    ऑंख से टपका तो मोती बन गया
    अश्‍क के बारे में ये मशहूर है।

    ReplyDelete
  18. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है

    हर शेर पर दाद देने को जी चाहता है, आप की गजलों की किताब कब तक छप कर आयेगी? अगर ऑलरेडी मार्केट में है तो बताइए कहां से ली जा सकती है?

    ReplyDelete
  19. क्या बात है नीरज जी! पूरी ग़ज़ल फलसफे के रंग में रंगी हुई है. अभी तो होली का रंग भी नहीं उतरा कि ख़्वाब, तन्हाई, मजबूरी, धोका, ग़म और दर्द सब समेट लाये है अपने शेरो में. और

    "गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है"
    .....आसान लफ्जों में बड़ी गहरी बात कह दी है.

    "दर्द हो काफूर जल्दी आपका",
    ये दुआए दे रहा मंसूर है.

    -mansoor ali hashmi
    http://aatm-manthan.com

    ReplyDelete
  20. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है....
    ....
    har sher mukkmala... behatreen gazal

    ReplyDelete
  21. आलमे तन्हाई का दोज़ख है क्या
    पूछ उस से, जो बहुत मशहूर है

    यह भी एक यथार्थ है ।

    सुन्दर अश` आर से सुशोभित बढ़िया ग़ज़ल ।

    ReplyDelete
  22. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है

    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    वाह वाह! नीरज जी, क्या शेर निकले हैं !
    बेहतरीन ग़ज़ल

    ReplyDelete
  23. जो उसूलों पर टिका, उसके लिए
    बस यही समझे सभी, मजबूर है

    ...बहुत खूब! बेहतरीन गज़ल...हरेक शेर बहुत सार्थक और उम्दा..

    ReplyDelete
  24. जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर
    दर्द वो होता नहीं काफूर है
    बेहतरीन, लाजवाब!!

    ReplyDelete
  25. जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर
    दर्द वो होता नहीं काफूर है
    Behad khoobsurat gajal.

    ReplyDelete
  26. फलों से लदा होने पर भी जो झुका रहे,
    करे न कभी खुद पर गुरूर है,
    हम है मुरीद दिल से उस शख्स के,
    नाम उसका नीरज गोस्वामी हुज़ूर है...

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  27. गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    बहुत ख़ूब !

    ReplyDelete
  28. Comment received through e-mail:-


    Wonderful, anubhavon ka nayab khazana.
    thanks..............

    CM Gupta

    ReplyDelete
  29. आलमे तन्हाई का दोज़ख है क्या
    पूछ उस से, जो बहुत मशहूर है

    waah sir , kya baat likhi hai ,,seedhe dil me utar gayi

    aabhar

    ReplyDelete
  30. नीरज जी ,
    बेहद खूबसूरत गज़ल है ..हर शेर बहुत गहन और सहज भाषा में लिखा हुआ ...बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें.. इसे मैंने चुरा लिया है :) :) बांटने के लिए

    ReplyDelete
  31. सुन्दर रचना.

    जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर
    दर्द वो होता नहीं काफूर है

    आरम्भ से अंत तक बाँधकर रख दिया.
    एक-एक शेर दमदार.

    ReplyDelete
  32. छोटी बहर की बेहतरीन गज़ल..वाह!! आनन्द आ गया.

    ReplyDelete
  33. Comment received on e-mail:-

    Neera bhai kiya ghazal hai masha aalah kiya kikhte hein aap

    Chaand

    Denmark

    ReplyDelete
  34. गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    तभी तो ख़ुशी और ग़म दोनों मौक़ों पर आँखें भर आती हैं. प्यारा शेर.
    पूरी ग़ज़ल लाजवाब.

    ReplyDelete
  35. देखिये जिसको, वही मगरूर है
    मौत को, शायद समझता दूर है

    आइना दिखाता शे'र .....

    मुस्कुराकर देखते हैं, फिर नया
    हो गया ग़र ख्वाब, चकनाचूर है

    चलने का नाम ही है ज़िन्दगी .....

    जो उसूलों पर टिका, उसके लिए
    बस यही समझे सभी, मजबूर है

    कहाँ से लाते हैं ऐसी सोच ....?


    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है

    नमन इस शे'र के लिए .......

    जो मिले अपनो से 'नीरज', उम्र भर
    दर्द वो होता नहीं काफूर है

    सुभानाल्लाह .......!!

    ReplyDelete
  36. मुस्कुराकर देखते हैं, फिर नया
    हो गया ग़र ख्वाब, चकनाचूर है

    बहुत खूबसूरत बेहतरीन गज़ल...हरेक शेर बहुत सार्थक और उम्दा...हर एक लाईन तराशी हुई सी लगती हैं..

    ReplyDelete
  37. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है

    वैसे तो पूरी ग़ज़ल लाजवाब है ... पर मुझे ये शेर गजब का लगा ...

    ReplyDelete
  38. धूल झोंकी है उसी ने, आँख में
    हम जिसे कहते थे, इनका नूर है
    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है..


    बेहद शानदार अशआर.....
    बहुत अच्छी ग़ज़ल ...

    ReplyDelete
  39. अश्‍क और इश्‍क का बस यही दस्‍तूर है।

    ReplyDelete
  40. आलमे तन्हाई का दोज़ख है क्या
    पूछ उस से, जो बहुत मशहूर है

    गम ख़ुशी में फर्क ही करता नहीं
    क्या अजब, ये अश्क का दस्तूर है


    kya baat hai bahut khoob janab.

    ReplyDelete
  41. भाई नीरज बधाई सुंदर गज़ल |

    ReplyDelete
  42. मुस्कुराकर देखते हैं, फिर नया
    हो गया ग़र ख्वाब, चकनाचूर है
    बहुत उम्दा नीरज जी, वाह

    जो उसूलों पर टिका, उसके लिए
    बस यही समझे सभी, मजबूर है
    आज के दौर की हक़ीक़त बयान करता शेर.

    ReplyDelete
  43. umda!!! mubarakbad lijiye dil se!!

    ReplyDelete
  44. आदरणीय नीरज जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ियों के चलते पिछले दिनों कम सक्रिय रह पाया … आगे भी उलझे रहने की संभावना है …

    आशा है , क्षमा कर देंगे …

    पूरी ग़ज़ल हमेशा की तरह नायाब ! बेमिसाल !
    जो उसूलों पर टिका, उसके लिए
    बस यही समझे सभी, मजबूर है


    दिल से दाद है … तमाम अश्'आर के लिए …

    गणगौर और नवरात्रि की शुभकामनाएं !

    साथ ही…

    नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
    पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!

    चैत्र शुक्ल शुभ प्रतिपदा, लाए शुभ संदेश !
    संवत् मंगलमय ! रहे नित नव सुख उन्मेष !!

    *नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !*


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  45. कितनी दीवारें उठी हैं एक घर के दर्मियां
    घर कहीं ग़ुम हो गया दीवारो-दर के दर्मिया
    isi ehsaas se zindagi shuru hoti hai subah se ... phir raat aa jati hai

    ReplyDelete
  46. कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई
    ...प्रशंसनीय रचना

    ReplyDelete

तुझको रक्खे राम तुझको अल्लाह रक्खे
दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रक्खे