Monday, October 29, 2018
किताबों की दुनिया -201
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मिले तो खैर न मिलने पे रंजिशें कैसी कि उससे अपने मरासिम थे पर न थे ऐसे *** आस कब दिल को नहीं थी तेरे आ जाने की पर न ऐसी कि क़दम...
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