Monday, December 25, 2017
किताबों की दुनिया - 157
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नदी, झरने, किताबें, चाँद, तारे और तन्हाई वो मुझसे दूर हो कर हर किसी के पास जा बैठा मैं जब घबरा गया हर रोज़ के सौ बार मरने से उठा...
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