Monday, October 26, 2015
किताबों की दुनिया -112
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आँख भर आयी कि यादों की धनक सी बिखरी अब्र बरसा है कि कंगन की खनक सी बिखरी अब्र = बादल जब तुझे याद किया रंग बदन का निखरा जब ति...
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