Monday, July 27, 2015
किताबों की दुनिया -106
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मैं समंदर हूँ मुझको नदी चाहिए ज़िन्दगी में मुझे भी ख़ुशी चाहिए तेरी खुशबू, तेरे जिस्म का नूर हो बंद कमरे में बस तीरगी चाहिए ...
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