Monday, August 26, 2013
हर तस्वीर अधूरी है
›
(पेशे खिदमत है ,छोटी बहर में एक निहायत सादा सी ग़ज़ल) ये कैसी मजबूरी है जो लोगों में दूरी है क्यूँ फिरता पगलाया सा त...
27 comments:
‹
›
Home
View web version