Sunday, September 30, 2007
आंखे खोल के देखो
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जान उन बातों का मतलब जो होती हैं सी कर लब सब जब कहते एक ही है क्यों हिस्सों में बांटों रब शाम हुई दिल बैठ रहा है अभी बितानी सारी शब रोना हँस...
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