Monday, June 23, 2014

आसमाँ किस सहारे होता है ?


एक ग़ज़ल यूँ ही बैठे -ठाले 




कौन कहता है छुप के होता है 
क़त्ल अब दिन दहाड़े होता है 

गर पता है तुम्हें तो बतलाओ 
इश्क कब क्यों किसी से होता है 

ढूंढते हो सदा वहाँ उसको 
जो हमेशा यहाँ पे होता है 

धड़कनें घुँघरुओं सी बजती हैं 
दिल जब उसके हवाले होता है 

आरज़ू क्यों करें सहारे की 
आसमाँ किस सहारे होता है ? 

चीख कर क्यों सदायें देते हो 
जब असर बिन पुकारे होता है 

उम्र ढलने लगी समझ 'नीरज ' 
दर्द अब बिन बहाने होता है

22 comments:

Vaanbhatt said...

खूबसूरत ग़ज़ल...हर शेर सटीक...

शारदा अरोरा said...

बढ़िया ग़ज़ल
आरज़ू क्यों करें सहारे की
आसमाँ किस सहारे होता है ?
फिर भी पूछते हो ..
इश्क कब क्यों किसी से होता है ....ये सहारा नहीं तो और क्या है ...?

SATISH said...

Bahut mubaarak....

"ढूंढते हो सदा वहाँ उसको
जो हमेशा यहाँ पे होता है"

Waaaaaaah bahut khoob..... Kya kahney ......Raqeeb Lucknowi

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (24-06-2014) को "कविता के पांव अतीत में होते हैं" (चर्चा मंच 1653) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

मान जाऊंगा..... ज़िद न करो said...

आरजू क्यों करें सहारे की
आसमां किस सहारे होता है?

बहुत खूब क्या शेर कही.... साधुवाद

तिलक राज कपूर said...

दिल खुश हुआ हुजूर।
इस उम्र में जानकर क्‍या करेंगे कि ''इश्क कब क्यों किसी से होता है ''

bhasker tiwari said...

खूब लिखा है सर जी 'यूँ ही बैठे- ठाले'

"धड़कने घुंघरुओं सी बजतीं,
जब दिल किसी के हवाले होता है "

PRAN SHARMA said...

Har Sher Umdaa Hai . Mubaaraq .

प्रदीप कांत said...

उम्र ढलने लगी समझ 'नीरज '
दर्द अब बिन बहाने होता है

ACHCHI GAZAL

Saurabh said...

सही कहूँ तो आपने अरसे बाद बातें कीं. लेकिन अच्छी कीं.
जवाब नहीं -
आरज़ू क्यों करें सहारे की
आसमाँ किस सहारे होता है ?

मुबारकां

आशा जोगळेकर said...

बहुत सुंदर गज़ल।

shorya Malik said...

वाह मजा आ गया ।

parul singh said...

धड़कनें घुंघरूओं सी बजती हैं,,
आरजू क्यूँ करे सहारे की
,वाह हर शेर लाजवाब।

नीरज गोस्वामी said...

Received on mail:-

उम्र ढलने लगी समझ 'नीरज '
दर्द अब बिन बहाने होता है
very true.Beautiful gazal.

Parmeshwari Chaudhry

नीरज गोस्वामी said...

Received on Mail:-

BHAI NEERAJ JI
NAMSATY
THANKS FOR SENDING SUCH A NICE PIECE OF GAZAL,
ESPECEIALLY THESE LINE:-

चीख कर क्यों सदायें देते हो
जब असर बिन पुकारे होता है

उम्र ढलने लगी समझ 'नीरज '
दर्द अब बिन बहाने होता है

WHEN COMING TO DELHI NEXT TIME? MOST WELCOME--
-REGDS
-OM SAPRA
9818180932

नीरज गोस्वामी said...

Received on Mail:-

गर पता है तुम्हें तो बतलाओ
इश्क कब क्यों किसी से होता है
________वाह________
अच्छा है !


Aalam Khursheed

नीरज गोस्वामी said...

Received on mail:-

चीख कर क्यों सदायें देते हो
जब असर बिन पुकारे होता है

​Sir,
Good morning!
Bahut kuchh seekha diya h en shabdo ne aur panktiyo ne.
Hats off​

Ramesh Sachdeva

dr.mahendrag said...

आरज़ू क्यों करें सहारे की
आसमाँ किस सहारे होता है ?
खूबसूरत अशआर नीरजजी

नीरज गोस्वामी said...

Received on Mail:-

bahut achha

B.R.Vipallavi

Onkar said...

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल

नीरज गोस्वामी said...

Received on e-mail :-

Is gazal ke ye sher dil ko chhu gaye..
गर पता है तुम्हें तो बतलाओ
इश्क कब क्यों किसी से होता है

आरज़ू क्यों करें सहारे की
आसमाँ किस सहारे होता है?

Vishal Mishra

dr.rajkumar patil said...

गागर में सागर..बेहतरीन