Monday, November 18, 2013

आप भी तो अब पुराने हो गये




दूर होंठों से तराने हो गये 
हम भी आखिर को सयाने हो गये 

यूं ही रस्ते में नज़र उनसे मिली 
और हम यूं ही दिवाने हो गये 

दिल हमारा हो गया उनका पता 
हम भले ही बेठिकाने हो गये 

खा गई हमको भी दीमक उम्र की 
आप भी तो अब पुराने हो गये 

फिर से भड़की आग मज़हब की कहीं 
फिर हवाले आशियाने हो गये 

खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब 
बेसबब मौसम सुहाने हो गये 

आइये मिलकर चरागां फिर करें 
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये 

लौटकर वो आ गये हैं शहर में 
आशिकों के दिन सुहाने हो गये 

देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये 
बात इतनी थी, फसाने हो गये

33 comments:

रविकर said...

बढ़िया-
सुन्दर प्रस्तुति-
आभार आदरणीय-

Majaal said...

खा गई हमको भी दीमक उम्र की
आप भी तो अब पुराने हो गये

खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
बेसबब मौसम सुहाने हो गये

आइये मिलकर चरागां फिर करें
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये

देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये
बात इतनी थी, फसाने हो गये

बढ़िया !!

सदा said...

खा गई हमको भी दीमक उम्र की
आप भी तो अब पुराने हो गये
वाह ... बहुत खूब कहा आपने इन पंक्तियों में
सादर

Digamber Naswa said...

जब दिल इतने जवाँ हों तो पुराने कैसे हो सकते हैं आप ... और सयाने तो कभी भी नहीं ...

मदन मोहन सक्सेना said...

सुन्दर प्रस्तुति

अरुन शर्मा अनन्त said...

वाह वाह बेहद उम्दा शानदार जानदार ग़ज़ल ढेरों दिली दाद कुबूल फरमाएं.

Manu Tyagi said...

badhiya

Navin C. Chaturvedi said...

मैं दिगंबर जी की बातों से सहमत हूँ।
बहुत बढ़िया ग़ज़ल है बड़े भाई।
जीते रहिए।

सर्व said...

बहुत खूब! बहुत ही सुन्दर!


खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
बेसबब मौसम सुहाने हो गये

देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये
बात इतनी थी, फसाने हो गये

आते है मेरे शहर में वो मगर
और भी उनके ठिकाने हो गये

शारदा अरोरा said...

badhiya ...

pran sharma said...

dekh kar neeraj ko vo muskaa diye
baat itnee thee , fasaane ho gaye

kyaa baat hai !

chitra bhee kamaal kaa hai
chasm-e-baddoor

vandana said...

खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
बेसबब मौसम सुहाने हो गये

आइये मिलकर चरागां फिर करें
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये

वाह नीरज सर बहुत बढ़िया ग़ज़ल

तिलक राज कपूर said...

देखकर "नीरज" को वो मुस्का दिये
बात इतनी थी, फसाने हो गये
ये इतनी सी बात है;क्‍या बात करते हैं जनाब।

parul singh said...

वाह सर सबसे ऊपर आपकी और मैम की
फोटो देखकर दिल खुश हो गया।
ये खूबसूरत गजल लगता है आपने बतौर
शादी की सालगिरह का तौहफा
मैम के लिए लिखी है बढिया तौहफा है जी
मगर पुराने होने वाली बात पर आपके और
मैम के लिए आपका ही एक शेर नजर है.....
प्यार हमारा ना होगा अगर
हम बुलाते रहे वो लजाते रहे ��

parul singh said...

शेर कृपया ऐसे पढे..

प्यार बासी हमारा ना होगा अगर
हम बुलाते रहे वो लजाते रहे ��

Rajesh Kumari said...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार१९/११/१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है।

Neeraj Kumar said...

वाह वाह बहुत खूब

राजीव कुमार झा said...

आइये मिलकर चरागां फिर करें
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये
बहुत खूब !

कविता रावत said...

वक्त का तकाजा है ..समय के साथ एक जैसा कुछ भी रह जाता है!
बहुत सुन्दर रचना ..

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

लाजवाब ग़ज़ल के लिए बधाईयाँ................

Yashwant Yash said...

कल 20/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

dr.mahendrag said...

दिल हमारा हो गया उनका पता
हम भले ही बेठिकाने हो गये
आइये मिलकर चरागां फिर करें
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये

लौटकर वो आ गये हैं शहर में
आशिकों के दिन सुहाने हो गये सुन्दर अभिव्यक्ति.
कहना चाहूंगा,करें क्या उनका जो हमारी जरा सी बात पर बेगाने हो गए.

expression said...

तिरछी टोपी वाले और उनके साथी कभी पुराने नहीं होते सर :-)
फिर शायरों की तो बात ही और है..
बेहतरीन ग़ज़ल..

सादर
अनु

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

Jab se aapne hame bhula diya tab se kaafi dinon baad aapko padh raha hoon..
Wahi nasha hai.. Makta kamaal!!

Vaanbhatt said...

आइये मिलकर चरागां फिर करें
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये...

लाजवाब...

HARSHVARDHAN said...

सुन्दर रचना।।

नई कड़ियाँ : मेरी भोपाल यात्रा (पहला दिन) - श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, भोपाल

अपने ब्लॉग और वेबसाइट को सर्च इंजन में फ्री सबमिट करे।

सीमा रानी said...

वाह॥वाह...वाह वाह ...वाह वाह

Onkar said...

सुन्दर ग़ज़ल

Neeraj Kumar said...

बहट ही उम्दा ग़ज़ल हुई है ..

Mansoorali Hashmi said...

'Cowboy' आप तो बेग़म 'Sherif'
शहर में अब जाने-माने हो गये .
http://mansooralihashmi.blogspot.in

Manu Tyagi said...

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

welcome to Hindi blog reader

ARUN SATHI said...

आइये मिलकर चरागां फिर करें
आंधियां गुजरे, ज़माने हो गये
बहुत बेहतरीन ....

Shiv Kumar Sahi said...

Charanbandna Sir Ji

खा गई हमको भी दीमक उम्र की
आप भी तो अब पुराने हो गये


खिलखिला के हंस पड़े वो बेसबब
बेसबब मौसम सुहाने हो गये


लौटकर वो आ गये हैं शहर में
आशिकों के दिन सुहाने हो गये

bahut hi sunder kya baat hein..